Harish Rana case: आख़िर माँ बाप के कदम के पीछे कितना दर्द ! देश के इतिहास का पहला EUTHANISA!
13 साल की लंबी लड़ाई, दर्द और उम्मीद के बाद हरिश राणा केस में एक ऐतिहासिक फैसला सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार एक ऐसे मामले में इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जहाँ माता-पिता अपने बेटे की असहनीय पीड़ा को खत्म करना चाहते थे। हरिश राणा पिछले 13 सालों से गंभीर हालत में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। उनके माता-पिता ने अदालत से गुहार लगाई कि उनके बेटे को इस दर्द से मुक्ति दी जाए। कोर्ट ने सभी मेडिकल रिपोर्ट और परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला सुनाया। यह फैसला भारत में इच्छामृत्यु की बहस को फिर से चर्चा में ले आया है। इस केस ने समाज, कानून और मानवता से जुड़े कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर माता-पिता के इस कदम के पीछे कितना दर्द छिपा था, यह कहानी उसी सच्चाई को सामने लाती है।
Video Published On: Wednesday, Mar 11, 2026, 10:41 [IST]


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