Sundar Pichai Coffee: क्या है मॉनसून्ड मालाबार कॉफी, जिसके मुरीद हुए सुंदर पिचाई, हवा-नमी से बदल जाता है स्वाद
Sundar Pichai Bharat GI Coffee Video: गूगल CEO सुंदर पिचाई की AI Impact Summit की एक तस्वीर ने इंटरनेट पर सनसनी मचा दी है। हाथ में कॉफी का कप और चेहरे पर सुकून भरी मुस्कान, लेकिन यह कोई आम कॉफी नहीं थी। यह थी भारत की गर्व, 'GI-टैग' वाली मॉनसून्ड मालाबार कॉफी।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्वारा शेयर किए गए वीडियो में पिचाई इस खास भारतीय फ्लेवर की तारीफ करते नजर आए। आखिर क्या है इस कॉफी का 'गोल्डन' राज और कहाँ होता है इसका उत्पादन? आइए जानते हैं इस 'देसी' स्वाद के पीछे की पूरी कहानी।

Bharat GI Coffee: क्या है 'मॉनसून्ड' प्रोसेस का जादुई राज?
सुंदर पिचाई ने जिस 'मॉनसून्ड मालाबार' का स्वाद लिया, उसकी मेकिंग दुनिया में सबसे अनोखी है। इसे 'मॉनसून्ड' इसलिए कहते हैं क्योंकि कॉफी बीन्स को काटकर करीब 3-4 महीने तक अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाओं और नमी के बीच खुला रखा जाता है। इस प्रक्रिया से बीन्स का रंग बदलकर सुनहरा (Golden) हो जाता है और उनका कड़वापन खत्म होकर एक मखमली मिठास आ जाती है। यही वो 'स्पेशल प्रोसेस' है जो इसे दुनिया की किसी भी दूसरी कॉफी से अलग बनाती है।
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कहां होता है इस अनोखी कॉफी का उत्पादन?
इस खास कॉफी का उत्पादन मुख्य रूप से भारत के मालाबार तट यानी केरल और कर्नाटक के तटीय इलाकों में होता है। कॉफी के पौधे तो पश्चिमी घाट के चिकमंगलूर, कूर्ग और वायनाड की पहाड़ियों पर उगते हैं, लेकिन उन्हें 'मॉनसून्ड' करने का काम मंगलुरु (कर्नाटक) और कोझिकोड (केरल) के तटों पर बने विशेष गोदामों में होता है। समुद्र की नम हवाओं के बिना इस स्वाद को पैदा करना नामुमकिन है, इसलिए यह सिर्फ इसी क्षेत्र की विशेषता है।
'GI-टैग' की ताकत और इसकी पहचान
GI टैग (Geographical Indication) इस कॉफी के लिए एक 'प्रमाण पत्र' की तरह है। यह कानूनी रूप से सुनिश्चित करता है कि 'मॉनसून्ड मालाबार' नाम का इस्तेमाल सिर्फ वही कर सकते हैं जो इसे मालाबार तट की खास जलवायु में तैयार करते हैं। सुंदर पिचाई जैसे ग्लोबल आइकन द्वारा इसे पसंद किए जाने से इस क्षेत्र के हजारों कॉफी किसानों और उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। यह टैग बताता है कि इस स्वाद की नकल दुनिया में कहीं और नहीं हो सकती।
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'Bharat GI' पहल और ग्लोबल ब्रांडिंग
DPIIT के तहत शुरू हुई 'Bharat GI' पहल का मकसद ही यही है कि मॉनसून्ड मालाबार जैसे 'प्रीमियम' प्रोडक्ट्स को दुनिया के बाजारों में 'लक्जरी ब्रांड' के रूप में पेश किया जाए। AI समिट में पिचाई का बरिस्ता से इस कॉफी के बारे में चर्चा करना और इसकी प्रशंसा करना यह साबित करता है कि भारत की पारंपरिक खेती और मिट्टी का स्वाद अब वैश्विक मंच पर धूम मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।












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