Delhi to Vrindavan: भगवान श्री कृष्ण की नगरी वृंदावन घूमने का हैं प्‍लान तो नोट कर लें यह खास बातें

कृष्ण की नगरी वृंदावन जाने का हर किसी का मन रहता है। यदि आप दिल्ली NCR के रहने वाले हैं और आप भी वृंदावन जाने का प्‍लान बना रहे हैं तो आज हम गाइड करेंगे, जिससे आपका सफर बिना किसी परेशानी के पूरा हो सके।

बस से कैसे पहुंचे

अगर आप दिल्ली से वृंदावन बस के माध्यम से जाना चाहते हैं, तो दिल्ली के महाराणा प्रताप इंटरनेशनल बस स्टैंड से आपको वृंदावन के लिए ऑनलाइन टिकट बुक करना होगा। जिसकी कीमत करीब 250 रुपये से 2000 रुपये तक हो सकती है। यहां से आपको बस के द्वारा करीब तीन घंटा 40 मिनट वृंदावन पहुंचने में लगेगा। आप ऑनलाइन के माध्‍यम से इसके लिए टिकट बुक कर सकते हैं। यदि आप अपनी पर्सनल गाड़ी से दिल्ली से वृंदावन जाना चाहते हैं, तो आपको बता दें कि दिल्ली से वृंदावन की दूरी 144 किलोमीटर है।

Vrindavan

दिल्‍ली से वृंदावन के लिए ट्रेन
यदि आप ट्रेन के माध्यम से दिल्ली से वृंदावन जाना चाहते हैं, तो आपको सबसे पहले मथुरा रेलवे स्टेशन जाना होगा। मथुरा से वृंदावन 12 किलोमीटर है। मथुरा रेलवे स्टेशन के बाहर कई सारे ऑटो ई रिक्शा लगी होती हैं, जो आपको 40 से ₹ 50 में वृंदावन तक छोड़ती है।

वृंदावन में ठहरने की सुविधा
आपको बता दें वृंदावन में ठहरने की सुविधा भी रहती है। इसके लिए आपका आश्रम में 500 से 700 और होटल में 900 से 1200 तक का खर्चा होता है। साथ ही गवर्नमेंट द्वारा टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर भी मौजूद है, जिसमें एक बेड में 200 का खर्चा आता है। वृंदावन में सभी मंदिर आसपास है, इसलिए आप पैदल यात्रा कर सभी मंदिर आसानी से घूम सकते हैं।

मंदिर खुलने का समय
आप जिस समय भी जा रहे हैं याद रखें कि आपको सुबह जल्दी उठना होगा, क्योंकि वृंदावन के सारे मंदिर सुबह 7:00 से 8:00 बजे के बीच खुल जाते हैं और दोपहर के 12 बजे से 4 बजे तक वृन्दावन के सारे मंदिर बंद हो जाते हैं।
इस बीच आप अपना लंच व खाना पीना कर सकते हैं या फिर आप यमुना तट पर बने केशी घाट पर भी घूम सकते हैं। यहां वोटिंग का भी मज़ा ले सकते हैं। यह वहीं घाट है, जहां श्री कृष्ण ने राक्षस केशी का वध कर यमुना में स्नान किया था।

वृंदावन में उठाएं खाने का लुफ्त
खाने की बात करें तो यहां आपको 100 से 150 रुपए भर प्लेट खाना मिलेगा। लेकिन, आपका बजट इससे भी काम है, तो यहां कई जगह आपको फ्री में स्वादिष्ट भोजन मिल जाएगा। जैसे गौरी गोपाल आश्रम, अन्नपूर्णा रसोई, श्रीजी रसोई, इसके अलावा यहां की लस्सी काफी अच्छी और फेमस होती है।

वृंदावन जाने का सबसे अच्छा समय अगस्त से मार्च का होता है ,क्योंकि इसके बाद वृंदावन में बहुत धूप और गर्मी होती है जिस कारण मंदिर घूमने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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