तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कर्नाटक की हार का साया, अंदरूनी कलह ने बिगाड़ी बीजेपी की राह?

तेलंगाना में भाजपा का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2019 के आम चुनावों के दौरान था, जब उसने चार लोकसभा सीटें जीती थीं। अब पार्टी अंदरूनी कलह से जूझ रही, ऐसे में उन्हें बरकरार रखना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती होगी।

तेलंगाना में 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में कैसा प्रदर्शन करती है। अभी जैसी स्थिति है, संभावनाएं उतनी अच्छी नहीं हैं।

Telangana

मई में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार और कांग्रेस की राजनीतिक किस्मत में स्पष्ट उछाल ने तेलंगाना में भगवा पार्टी के मनोबल को झटका दिया है।

क्या तीसरे नंबर पर जाएगी बीजेपी?
कुछ समय पहले भगवा पार्टी आक्रामक मोड में थी और खुद को तेलंगाना की सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के लिए मुख्य चुनौती के रूप में पेश कर रही थी, लेकिन अब माहौल बदलता दिख रहा है।

कर्नाटक में हार और तेलंगाना में आंतरिक कलह के कारण राज्य नेतृत्व में बदलाव ने पार्टी के मनोबल को दोहरा झटका दिया है। जिस तरह से बंदी संजय कुमार को हटाकर केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को पार्टी इकाई का अध्यक्ष बनाया गया, वो कई नेताओं और समर्थकों को पसंद नहीं आया।

पार्टी के भीतर कुछ नेताओं ने निजी तौर पर स्वीकार किया है कि ये परिवर्तन एक आत्मघाती कदम था, क्योंकि उनका मानना है कि वो संजय ही थे जिन्होंने भाजपा को राज्य में आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।

अपनी आक्रामक हिंदुत्व राजनीति के लिए जाने जाने वाले करीमनगर के सांसद संजय ने पार्टी को दो विधानसभा उप-चुनावों में जीत दिलाई। इसके अलावा ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) चुनावों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

उन्होंने "प्रजा संग्राम यात्रा" के जरिए पार्टी को मजबूत किया और बीआरएस पर जमकर बरसे। इसके लिए पीएम मोदी और अमित शाह ने उनकी तारीफ भी की थी। हालांकि, कर्नाटक में बीजेपी की हार ने हवा का रुख बदल दिया है। बीआरएस और अन्य दलों से नाराज लोग पहले बीजेपी में जाते थे, लेकिन अब वो कांग्रेस को प्राथमिकता दे रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय दलों के लिए शायद ही कोई राजनीतिक जगह है। राजनीतिक परिदृश्य में सत्तारूढ़ पार्टी वाईएसआर कांग्रेस और मुख्य विपक्षी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) का दबदबा है। इसके अलावा अभिनेता-राजनेता पवन कल्याण की जन सेना पार्टी (जेएसपी) तीसरी ताकत के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस की तरह भाजपा को भी 2019 में एक साथ हुए विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कोई सीट नहीं मिली। पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य में भगवा पार्टी की किस्मत में कोई बदलाव नहीं आया है।

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