'ओडिशा में बच्चों में सबसे अधिक बढ़ रहा स्क्रब टाइफस का संक्रमण', ICMR की स्टडी में दावा
क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (RMRC), भुवनेश्वर राज्य में टाइफस संक्रमण के मामलों को लेकर एक शोध किया है। अध्ययन से पता चला है कि लगभग 40 प्रतिशत स्क्रब टाइफस का संक्रमण पारेक्सिया वाले बच्चों में पाया गया। राज्य में क्योंझर स्क्रब टाइफस के संक्रमण में सबसे अधिक है। ओडिशा के सबसे अधिक प्रभावित चार जिलों में से एक है, जहां इस साल अब तक 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए। क्योंझर में स्क्रब टाइफस से अब तक आठ मौतें हो चुकी हैं।
ओडिशा के क्योंझर में पिछले तीन महीने में इस बीमारी से किसी की मौत नहीं हुई। हालांकि इस दौरान 630 से अधिक लोग जांच के दौरान स्क्रब टाइफस से संक्रमित पाए गए हैं। वहीं बारगढ़, सुंदरगढ़ और कालाहांडी में इस संक्रमण से मौत की सूचना मिली है।

क्या है स्क्रब टाइफस
स्क्रब टाइफस को आमतौर पर बुश टाइफस कहा जाता है। ये तेजी फैलने वाला संक्रमण है। दरअसल, ये एक जूनोटिक तीव्र ज्वर संबंधी बीमारी है, जिसे इलाज में देरी से संक्रमित व्यक्ति की मौत हो जाती है। इस बीमार से संक्रमित मरीजों की मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत है।
आदिवासी जिले में ICMR का स्वास्थ्य कार्यक्रम
चिंता की बात ये है कि देश या किसी भी राज्य में स्क्रब टाइफस के नियंत्रण के लिए कोई सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम लागू नहीं किया गया है। हालांकि क्योंझर में स्क्रब टाइफस के मामले बढ़ने पर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने इस आदिवासी जिले में इस पर पहला अध्ययन कर रही है। इसके साथ ही आईसीएमआर ने बीमारी के नियंत्रण और रोकथाम के लिए एक सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम भी शुरू किया है।
आरएमआरसी के निदेशक डॉ. संघमित्रा पति ने कहा कि बीमारी के शीघ्र निदान के लिए समुदाय स्तर से लेकर स्वास्थ्य प्रणाली तक शीघ्र पता लगाने और उपचार के लिए एक सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम तैयार किया गया है और इसे जिले में लागू किया गया है। इससे पहले, आरएमआरसी ने 2016 की महामारी के दौरान अस्पताल में भर्ती बच्चों से एकत्र किए गए संग्रहीत नमूनों पर 30 तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) / जापानी एन्सेफलाइटिस (JE) का सीरोलॉजिकल विश्लेषण किया था। शोध में जापानी एन्सेफलाइटिस संदिग्ध मामलों में से स्क्रब टाइफस के मामले 23.3 प्रतिशत पाए गए थे।












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