तेलंगाना: बीआरएस के खिलाफ एक अकेली लड़ाई लड़ रहे हैं रेवंत रेड्डी
क्या तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ए रेवंत रेड्डी खुद को पार्टी में अलग-थलग पड़ गए हैं? यदि हालिया घटनाक्रम को देखा जाए तो ऐसा ही प्रतीत होता है। विभिन्न मुद्दों पर सरकार और मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के खिलाफ हमला बोलने वाले रेवंत रेड्डी को अपनी ही पार्टी से कोई साथ नहीं मिल रहा है।
मंत्री के टी रामा राव और हरीश राव, और दासोजू श्रवण और हैदराबाद के पूर्व मेयर बोंथु राममोहन जैसे नेताओं ने मुख्यमंत्री और उनके बेटे के खिलाफ मोर्चा खोलने को लेकर रेवंत रेड्डी पर निशाना साधा।

पूर्व विधायक एरावथरी अनिल कुमार और पार्टी उपाध्यक्ष चमाला किरना कुमार रेड्डी जैसे नेताओं को छोड़कर रेवंत रेड्डी को बीआरएस नेताओं पर पलटवार करने के लिए मजबूर किया जा रहा है क्योंकि कार्यकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और प्रवक्ता जैसे वरिष्ठ नेताओं ने दूर रहने का फैसला किया है।
वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी कई तरह की अटकलों को जन्म दे रही है। रेवंत रेड्डी पर तीखे हमलें करने वालों में एक वित्त और स्वास्थ्य मंत्री हरीश राव भी थे। जिन्होंने कांग्रेस नेता पर टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था।
केवल दो कांग्रेस नेताओं ने हरीश राव की आलोचना पर साथ जबकि पार्टी के दिग्गज चुप रहे। पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों, मौजूदा विधायकों और सांसदों की चुप्पी कई लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, उनका मानना है कि अगर सत्ताधारी दल कांग्रेस नहीं बल्कि उनकी व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर अपने नेता को निशाना बनाता है तो उन्हें बचाने का कोई काम नहीं है।












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