पंजाब: सरकार राज्य के नीले कार्डधारकों की जांच कराएगी, मंत्री बोले- संपन्न लोगों के नाम कटेंगे
punjab news in hindi: पंजाब की करीब तीन करोड़ की आबादी में से 1.54 करोड़ लोगों की ओर से नीले कार्ड बनवाने से राज्य की राष्ट्रीय स्तर पर हो रही फजीहत के बीच अब सरकार ने इनकी जांच करने का फैसला किया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने सभी डिप्टी कमिश्नरों से 30 नवंबर तक नीले कार्ड धारकों की जांच करके रिव्यू रिपोर्ट मांग ली है। इस बात की पुष्टि खुद खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक ने की है।

विभाग को यह बात पच नहीं रही है कि पंजाब की आधी आबादी के पास नीले कार्ड हैं। सरकार का मानना है कि राज्य के कई संपन्न लोगों ने भी नीले कार्ड बनवा रखे हैं और वे केंद्र सरकार की ओर दी जा रही दो रुपये किलो गेहूं और 20 रुपये किलो दाल खरीद रहे हैं।
पिछले दिनों होशियारपुर में मर्सिडीज कार से आटा-दाल लेने पहुंचे एक व्यक्ति का वीडियो वायरल होने पर पंजाब सरकार की खासी खिल्ली भी उड़ी थी। अब सरकार के इस रिब्यू के बाद ऐसे सभी संपन्न परिवारों के नाम कटेंगे जिन्होंने यह कार्ड बनवा रखे हैं।
बता दें, शिरोमणि अकाली दल-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान द्वारा शुरू की गई नीले कार्ड की योजना शुरू से ही राजनीति का केंद्र रही है। अभी तक सभी सत्ताधारी पार्टियों ने इस योजना का जमकर उपयोग किया है।
विपक्ष हमेशा ही यह आरोप लगता रहा है कि सत्तारूढ़ पार्टी वोट बैंक के कारण अपने लोगों को इसका लाभ देता रहा है। यही कारण है कि पंजाब सरकार ने पहले 'घर-घर राशन' योजना 30 नवंबर से शुरू करने का मन बनाया था ताकि इस बात की जांच भी हो जाए कि नीले कार्ड के तहत सस्ता राशन लेने वाला परिवार वास्तव में गरीबी रेखा से नीचे है या नहीं।
हालांकि डिपो होल्डरों के हाई कोर्ट में जाने से पंजाब सरकार की यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। अब आप सरकार ने नीले कार्ड धारकों की जांच करवाने का फैसला लिया है। बता दें कि 2017 में कांग्रेस की सरकार आने के बाद नीले कार्ड धारकों की जांच हुई थी। हालांकि चुनावी वर्ष में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने जमकर नीले कार्ड बनाए थे। अब आप सरकार ने इसे रिव्यू करने का फैसला किया है।

पांच लाख का स्वास्थ्य बीमा लाभ कर रहा आकर्षित
तीन करोड़ की आबादी में से 1.54 करोड़ लोगों की ओर से नीले कार्ड का लाभ लेने के पीछे सबसे बड़ा कारण इस कार्ड पर पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा योजना है। पंजाब सरकार ने नीले कार्ड धारकों को पांच लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कवर किया हुआ है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस कार्ड को लेकर क्रेजी हैं। उन्हें लगता है कि नीला कार्ड बनने के बाद एक तो उन्हें सस्ता अनाज मिल जाएगा, वहीं उन्हें पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर भी मिलेगा।

सरकार अपने इस वादे पर पूरी तरह खरी उतरी
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने मौजूदा धान के सीजन की शुरुआत से पहले किसान, मज़दूर, मिल्लर और आढ़तियों के साथ वादा किया था कि उनको इस सीजन के दौरान कोई भी समस्या पेश नहीं आने दी जाएगी। सरकार अपने इस वादे पर पूरी तरह खरी उतरी है। राज्य में मंडियों में पुख़्ता प्रबंधों के कारण 184 लाख मीट्रिक टन धान के लक्ष्य में से अब तक 180 लाख मीट्रिक टन की खरीद एमएसपी के हिसाब से की जा चुकी है।

मंडियों में किसानों को कोई भी मुश्किल नहीं
अनाज भवन में धान के खरीद सीजन संबंधी पत्रकारों से बातचीत में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने बताया कि इस बार मंडियों में किसानों को कोई भी मुश्किल पेश नहीं आने दी गई। समय पर खरीद और ढुलाई की गई। खरीद के केवल 4 घंटे बाद ही किसानों को उनके बैंक खातों में अदायगियां कर दी गई।
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की तरफ से किसानों की सुविधा के लिए मंडियों में 1806 रिवायती खरीद केंद्र और 583 सार्वजनिक स्थानों के अलावा 37 राइस मिलों को अस्थायी खरीद केंद्र घोषित करके अलाटमैंट की गई, जिससे किसानों को कोई कठिनाई न हो।
उन्होंने बताया कि राज्य की खरीद एजेंसियों की तरफ से खरीदे गए धान के किसानों को अब तक 34263.40 करोड़ रुपये अदा किए जा चुके हैं। राज्य के बहुत से जिलों की मंडियों में धान की सरकारी खरीद आज से बंद की जा चुकी है और कुछेक स्थानों पर रहती खरीद प्रक्रिया भी आज शाम तक मुकम्मल हो जाएगी।
धान के सीजन के दौरान निर्विघ्न खरीद यकीनी बनाने के लिए कटारूचक्क ने विभाग के अलावा पंजाब मंडी बोर्ड की भी सराहना की। इसके इलावा दूसरे राज्यों से अनाधिकृत तौर पर आने वाले धान की रोक संबंधी किए उचित इंतजामों के लिए पंजाब पुलिस की भी सराहना की, जिनकी तरफ से पंजाब के साथ लगते अंतरराज्यीय बैरियरों पर नाके लगाए गए थे।
अन्य मुद्दों संबंधी मंत्री ने जानकारी दी कि जहां तक नीले कार्डों की वेरीफिकेशन का संबंध है तो यह 30 नवंबर तक पूरी कर ली जाएगी, जिससे सिर्फ योग्य लाभार्थियों को ही यह सुविधा हासिल हो सके। उन्होंने इस संबंधी खुशी ज़ाहिर की कि सरकार की तरफ से बनाई कस्टम मिलिंग नीति की केंद्र सरकार की तरफ से सराहना की गई है और राज्य को यह जानकारी दूसरे राज्यों के साथ भी सांझी करने के लिए कहा गया है।












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