पंजाब: सरकारी बसों से हो रहे डीजल गायब को रोकने के लिए भगवंत मान सरकार ने कर ली बड़ी तैयारी
स्टाफ की कारगुजारी से निराश पंजाब सरकार ने मशीनों का सहारा लेने का इरादा कर लिया है। पंजाब सरकार ने बसों में हो रहे डीजल की चोरी रोकने के लिए तेल टंकियों पर फ्यूल सेंसर लगाने की तैयारी कर ली है।
सरकार ने फ्यूल सेंसर लगाने के लिए टेंडर निकाल दिए है। इससे पहले सरकार ने तेल चोरी रोकने के लिए टीमें भी बनाकर देख ली परन्तु कोई ज्यादा फायदा नहीं हुआ। तेल चोरी रोकने के लिए पंजाब सरकार द्वारा बसों में ट्रैकिंग सिस्टम भी लगाने की तैयारी कर ली है।

तेल की टंकी पर लगने वाली मशीन फ्यूल सेंसर के टेस्ट भी हुए, जिसमे ये बात सामने आई कि जब टंकी से लीटरों में तेल निकाला गया तो सेंसर ने तुरंत हेडक्वार्टर में अलर्ट दे दिया। फिलहाल पंजाब रोडवेज के दो डिपो में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, केवल रोडवेज/पनबस की बसों में से प्रतिमाह तीन करोड़ रूपए के लगभग डीजल गायब हो रहा है। केवल रोडवेज और पनबस की बसों में प्रतिदिन एक टैंकर डीजल गायब हो जाता है, जिसमे 10,000 लीटर डीजल होता है जबकि पी.आर.टी.सी. के डीजल नुकसान का आंकलन अलग से है। फिलहाल फ्यूल सेंसर 100 बसों में लगाया जाना है।
कैसे होती है चोरी
रात को बसों की तेल टंकियों के अतिरिक्त बस कर्मचारियों पर भी तेल बेचने के आरोप लगते रहते है। परिवहन विभाग की रिपोर्ट में भी इस बात का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक कई बस कर्मचारी बसों को धीमी गति से चलाते है, बसों के ठिकानों पर भी कम रोकते है, बसों को स्थापित बस ठिकानों पर रुकने की जगह और शहर अथवा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में ले जाने की जगह फ्लाई ओवर से निकलते है। इन सब से तेल की खपत कम होती है। इसके अतिरिक्त बसों की एवरेज को भी कम दिखाया जाता है। जबकि अनेक बार तेल चोरी ढाबों पर दिखाई जाती है, जहां पर कथित मिलीभगत के तहत अन्य व्यक्ति तब तेल निकाल लेता है, जब कर्मचारी बस खड़ी करके इधर उधर जाते है। कुछ मामलों में वास्तव में भी तेल चोरी हो जाता है, जबकि कुछ मामलों में बस की खराबी के चलते एवरेज भी कम आती है।
पूर्व में सरकार के प्रयास
पंजाब सरकार के मिनिस्टर्स फ्लाइंग स्क्वायड द्वारा पिछले कुछ माह में छापेमारी के दौरान विभिन्न मामलों में बस कर्मचारियों को डीजल चोरी करते हुए काबू किया था। इनमे से एक बस पनबस चंडीगढ़ डिपो की और एक बस अमृतसर डिपो की थी। सरकार के पास ऐसी शिकायतें और इनपुट्स आ रहे थे कि सरकारी बसों में प्रतिदिन लाखों रुपयों का डीजल चोरी हो रहा है। तेल चोरी के मामले बढ़ने के बाद राज्य के परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने गत वर्ष परिवहन विभाग के महाप्रबंधकों समेत अन्य अधिकारियों की बैठक ली थी, जिसमे उन्होंने बसों से अधिकतम माईलेज सुनिश्चित करने के निर्देश पर की गई कारवाई का विवरण मांगा था और निर्धारित माइलेज पूरा नहीं करने वाले बस चालकों से की गई वसूली पर कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी थी। इसके बाद विभाग ने लगातार छापेमारी करने के लिए राज्य और डिपो स्तर की टीमों का गठन किया। तब मंत्री भुल्लर ने एक बैठक में कहा था कि उन्होंने विभिन्न बैठकों में अधिकारियों, ड्राइवरों और कंडक्टरों से ईंधन चोरी रोकने के लिए सहयोग मांगा था, लेकिन इन सबके बावजूद ईंधन चोरी की खबरें बरकरार है। टीमों को कहा गया था कि टीमें एक दिन में 8 घंटे की रोटेशन ड्यूटी के दौरान संबंधित बस स्टैंड और वर्कशॉप पर आने-जाने वाली और रात में रुकने वाली बसों से ईंधन चोरी पकड़ने के लिए कड़ी निगरानी रखेंगी और रिपोर्ट करेंगी।












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