ऑपरेशन लोटस: आप विधायक शीतल अंगुराल और रमन अरोड़ा ने बयान कराए दर्ज, ऑडियो SIT को सौंपी
चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी भाजपा पर पंजाब में ऑपरेशन लोटस चलाने का आरोप लगाती रही है। मामले में आप विधायकों ने विजिलेंस ब्यूरो की ओर से गठित की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के समक्ष अपने बयान दर्ज करवाने शुरू कर दिए हैं।

सोमवार को मोहाली स्थित विजिलेंस दफ्तर में जालंधर वेस्ट से विधायक शीतल अंगुराल और जालंधर सेंट्रल से विधायक रमन अरोड़ा ने अपने बयान दर्ज करवाए। विधायक शीतल अंगुराल से जिन दलालों ने संपर्क किया, उनकी ऑडियो एसआईटी को सौंपी।
वहीं, अरोड़ा ने एसआईटी को वह नंबर दिए जिनसे उन्हें काल आई थी। एसआईटी ने बयान दर्ज करने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। विधायकों ने कहा कि उन्होंने अपने बयान दे दिए अब आगे की जांच एसआईटी करेगी।
विधायक अंगुराल ने आरोप लगाया है कि इस मामले में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर शामिल हैं। बता दें, विधायक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का पहले ही नाम ले चुके हैं।
अंगुराल ने कहा कि उनसे दो लोगों ने संपर्क किया। दोनों ने खुद को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का एडवोकेट बताया, कहा कि वह भाजपा के संपर्क में है। उन्हें केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से मिलवाएंगे। उसके बाद अमित शाह से मिलवाया जाएगा। भाजपा में आने पर उन्हें 25 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
विधायक ने कहा कि अनुराग ठाकुर से सीधी कोई बात नहीं हुई। उनसे संपर्क करने वाले शख्स ने ही अनुराग ठाकुर का नाम लिया था, जाे लोग सुखना लेक के पास मुझसे मिलने पहुंचे, उन्होंने ही कहा था कि अमित बाबू ने मेरे लिए 25 करोड़ रुपये का गिफ्ट भेजा है। यह गिफ्ट केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर देंगे। अनुराग ठाकुर जल्दी ही मुझसे मुलाकात करेंगे और गिफ्ट देने के बाद भाजपा में शामिल कराएंगे।
वहीं विधायक रमन अरोड़ा ने कहा कि उनसे संपर्क करने वाले शख्स ने भाजपा के किसी नेता वगैरह का नाम नहीं लिया। अरोड़ा ने किसी केंद्रीय मंत्री का नाम लिए बगैर कहा कि उन्हें आरएसएस के एक बड़े पदाधिकारी खरीदने की कोशिश कर रहे थे।
बता दें, आम आदमी पार्टी के 10 विधायकों ने आपरेशन लोटस को लेकर मोहाली के स्टेट क्राइम थाने में मामला दर्ज करवाया था। यह मामला अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई है। इसमें तक किसी को नामजद नहीं किया गया। न ही कोई गिरफ्तारी हुई है।
आपरेशन लोटस के तहत उसके 25 विधायकों को भाजपा में शामिल होने के बदले में 25-25 करोड़ रुपये आफर करने के आरोप लगाए थे। हालांकि एफआइआर में 10 विधायक ही शिकायतकर्ता बने। इस मामले की जांच को विजिलेंस को सौंपा गया, जिसके बाद एसआइटी का गठन किया गया।












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