Odisha: ओडिशा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हड़ताल पर, चुनाव के बहिष्कार की दी चेतावनी
ओडिशा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने मांगें पूरी ना होने तक विरोध जारी रखने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा सरकार अगर जल्द से जल्द उनकी मांगें पूरी करने पर विचार नहीं करती तो वे उग्र विरोध को बाध्य होंगीं।
प्राथमिक शिक्षकों के विरोध के बीच अब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी विरोध कर रही हैं। इस हफ्ते शुक्रवार (23 सितंबर) को वे सड़कों पर उतरीं और अपनी मांगें पूरी नहीं होने पर आगामी चुनावों का बहिष्कार करने की चेतावनी दी। दरअसल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ईपीएफ, ईएसआईसी और ग्रेच्युटी का प्रावधान करने की भी मांग कर रही हैं।

ओडिशा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का ये विरोध लेडीज वर्कर्स एसोसिएशन के बैनर तले हो रहा है। जिसमें इस हफ्ते शुक्रवार को हजारों आंगनवाड़ी कार्यकर्ता महात्मा गांधी मार्ग पर एकत्र हुईं। अपने 10 सूत्री मांगों के समर्थन में विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा मानसून सत्र के दौरान निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा इस मामले को विधानसभा में उठाया जाना चाहिए।
एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि 30-40 वर्षों तक काम करने के बाद भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सेवानिवृत्ति के बाद दयनीय जीवन जीते हैं। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर सभी प्रकार की क्षेत्रीय गतिविधियों में सरकार की सहायता करने और आंगनवाड़ी कर्तव्यों का पालन करने के बावजूद, उनका पारिश्रमिक एक दैनिक मजदूर से भी कम है। विरोध में एसोसिएशन लगभग 25,000 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका शामिल हुईं।
एसोसिएशन की महासचिव कुंजलता दास ने कहा, "आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को केवल 7,500 रुपये और आंगनवाड़ी सहायिकाओं को 3,700 रुपये प्रति माह पारिश्रमिक दिया जा रहा है।" उन्होंने मांग की कि जब तक वे नियमित नहीं हो जाते, तब तक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए इसे बढ़ाकर 18,000 रुपये और सहायिकाओं के लिए 9,000 रुपये किया जाए।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगों में प्री-प्राइमरी शिक्षकों का दर्जा, सेवानिवृत्ति के दौरान 5 लाख रुपये का लाभ, 5,000 रुपये पेंशन और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका कल्याण बोर्ड का गठन भी शामिल है। मांगें पूरी ना होने पर एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि सभी 72,000 आंगनवाड़ी केंद्रों की 1.30 लाख कार्यकर्ताओं और सहायिका आंदोलन तेज करेंगी।












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