मध्य प्रदेश निकाय चुनाव: सिंधिया समर्थकों की दावेदारी ने उलझाया भाजपा-कांग्रेस का क्षेत्रीय गणित

नगरीय निकाय चुनाव में एक बार फिर सिंधिया समर्थक अपने-अपने क्षेत्रों से टिकट की आस लगाए हैं।

इंदौर, 8 जून। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा का दामन थामने के बाद हुए उपचुनाव में उनके सभी समर्थकों को पार्टी ने टिकट दिया था। अब नगरीय निकाय चुनाव में फिर सिंधिया समर्थक अपने-अपने क्षेत्रों से टिकट की आस लगाए हैं। इनमें से कुछ कांग्रेस के टिकट पर पिछले चुनाव में लड़ भी चुके हैं। भाजपा का दामन थामने के बाद दोनों दलों के क्षेत्रीय गणित में उलझन तय है। कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले सिंधिया समर्थकों की संख्या वैसे तो शहर में ज्यादा है, लेकिन पार्षद पद के लिए नजदीकी दावेदार चेहरे आधा दर्जन के करीब हैं। पिछले चुनाव में सभी ने कांग्रेस के लिए किला लड़ाया था। भाजपा को जहां पुराने कार्यकर्ताओं और सिंधिया समर्थकों में संतुलन जमाना होगा, वहीं कांग्रेस को ऐसे नेताओं के जाने के बाद नए विकल्पों पर विचार करना होगा।

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ऐसे बदले समीकरण
विधानसभा क्षेत्र इंदौर -1 : शहर के विधानसभा क्रमांक एक के विधायक को कांग्रेस ने अपना महापौर पद का प्रत्याशी घोषित किया है। इन्हीं के नजदीकी रिश्तेदार ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद केसरिया दुपट्टा पहन लिया था। अब यह वार्ड क्रमांक 13 से टिकट की आस में हैं और कैबिनेट मंत्री से नजदीकी के जरिये टिकट की जुगत में भी हैं। टिकट की होड़ में कितने भाग्यशाली होंगे, यह समय बताएगा।

विधानसभा क्षेत्र इंदौर -2 : शहर के दो नंबर विधानसभा में स्थानीय विधायक रमेश मेंदोला की पसंद से ही टिकट तय होते हैं, लेकिन शहर में सिंधिया के सबसे भरोसेमंद चेहरे को इसी क्षेत्र से टिकट की चाहत है। सिंधिया से नजदीकी इतनी है कि क्रिकेट के तमाम दिग्गजों को नजरअंदाज करते हुए सिंधिया ने इन्हें बीसीसीआइ भेज दिया था। इनके पिता भी कांग्रेस के पार्षद रह चुके हैं। कोरोनाकाल में सामाजिक कार्य करते हुए मैदानी पकड़ भी मजबूत की है। यह वार्ड 33 से टिकट की चाहत रखते हैं, जो इस बार सामान्य श्रेणी का है। पिछली बार यह वार्ड पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था और एमआइसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने नजदीकी अंतर से जीत हासिल की थी। यहीं के वार्ड 31 से एक अन्य सिंधिया समर्थक होड़ में हैं। पिछली बार यह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव हार गए थे।

विधानसभा क्षेत्र इंदौर -3 : विधानसभा तीन का वार्ड 64 सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। यहां से जिस सिंधिया समर्थक को टिकट की आस है, पिछली बार उनकी पत्नी कांग्रेस के टिकट पर यहीं से लड़ी थीं। मगर भितरघात का शिकार हो गई थीं। इस बार फिर दावा कर रहे हैं, लेकिन यहां स्थानीय विधायक आकाश विजयवर्गीय की सहमति अहम होगी।

विधानसभा क्षेत्र इंदौर -4 : शहर में अयोध्या कहलाने वाले इस क्षेत्र के व्यापारी बहुल सराफा क्षेत्र के वार्ड से पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर लड़ने वाले नेता अब भाजपा में आ गए हैं। पिछले चुनाव में इन्हें सफलता नहीं मिली थी। इस बार फिर दावेदारी कर रहे हैं।

विधानसभा क्षेत्र इंदौर -5 : पिछले चुनाव में मूसाखेड़ी क्षेत्र के वार्ड 51 में सिंधिया के नाम के सहारे टिकट की चाहत रखने वाले नेता की स्थानीय विधायक से भी सामंजस्य ठीक है। पिछले चुनाव में यह वार्ड महिला पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था। यहां इनकी पत्नी ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 2600 वोट हासिल किए। वे कांग्रेस की उम्मीदवार से कुछ ही कम थे, मगर इन मतों ने भाजपा की जीत पुख्ता कर दी थी। अब यह वार्ड सामान्य अनारक्षित हो गया है।

विधानसभा क्षेत्र - राऊ : इस विधानसभा के वार्ड 84 से टिकट की दावेदारी कर रहे नेता को उम्मीद है कि सिंधिया समर्थक कैबिनेट मंत्री से स्थानीय भाजपा छत्रपों के संबंध मधुर हैं। यही रिश्ते इन्हें टिकट दिला सकते हैं।

-कांग्रेस बहुत बड़ी पार्टी है। किसी के जाने से फर्क नहीं पड़ेगा। हमारे पास बहुत से उम्मीदवार हैं। -विनय बाकलीवाल, शहर अध्यक्ष, कांग्रेस

-सभी भाजपा के कार्यकर्ता हैं। पार्टी को जो भी योग्य लगेगा, उसे टिकट दिया जाएगा। -गौरव रणदिवे, नगर अध्यक्ष, भाजपा

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