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Jharkhand: बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा झारखंड, प्रोजेक्ट्स का काम पूरा करने को रखी गई ये डेडलाइन

झारखंड अगले साल बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा। अपनी मांग की 70 फीसदी से अधिक बिजली के लिए सेंट्रल पूल पर निर्भर रहने वाला झारखंड न सिर्फ अपनी जरूरत पूरी कर लेगा, बल्कि व्यस्त समय के दौरान बिजली बेच कर मुनाफा भी कमाने लगेगा। यह मुमकिन होगा राज्य में बन रही बिजली उत्पादन की दो इकाइयों नॉर्थ कर्णपुरा और पतरातु की यूनिटें चालू होने पर।

राज्य में बिजली की वर्तमान मांग 2500 और अगले पांच वर्षों में अनुमानित 3500 मेगावाट की मांग पर भी आपूर्ति के लिए झारखंड आत्मनिर्भर होगा। झारखंड में बिजली की मांग रोज औसतन 2500 मेगावाट है। सरकारी स्तर पर केवल टीवीएनएल से करीब 350 मेगावाट उत्पादन हो रहा है। यहां की दोनों यूनिटों की कुल क्षमता 420 मेगावाट है। राज्य अपनी बिजली की मांग का 70 फीसदी से अधिक राष्ट्रीय ग्रिड से करार के तहत खरीद कर पूरी करता है। इस समय सेंट्रल पुल (एनटीपीसी, पीडीसी, एनएचपीसी) से करीब 900 मेगावाट बिजली खरीद रहा है।

Hemant Soren,

डीवीसी से 600 मेगावाट बिजली रोज खरीदी जा रही है। इसके अतिरिक्त करीब 250 से 450 मेगावाट सौर ऊर्जा, 100 से 300 मेगावाट पवन ऊर्जा और 100 से 150 मेगावाट हाइड्रो पावर सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से खरीदी कर मांग और आपूर्ति में संतुलन बनाया जा रहा है। स्थानीय निजी उत्पादन इकाइयों से भी करीब 150 मेगावाट बिजली खरीद का समझौता किया हुआ है।

क्या कहते हैं अधिकारी
पीवीयूएनएल के सीईओ रविंद्र कुमार के अनुसार पहली यूनिट से 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन अप्रैल 2024 से शुरू करने का लक्ष्य है। वहीं, छह-छह माह के अंतराल पर 800 मेगावाट की दो और यूनिटें स्थापित करने का लक्ष्य है। वहीं, जेबीवीएनएल वितरण और परियोजना निदेशक केके वर्मा के अनुसार पांच वर्षों में बिजली की मांग राज्य में 2500 से बढ़कर 3500 मेगावाट पहुंचने का अनुमान है। तब तक इन्हीं दोनों प्लांटों से राज्य को 3900 मेगावाट बिजली मिलने की उम्मीद है। अगले पांच वर्षों में राज्य में 4000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया।

1. पतरातू विद्युत उत्पादन निगम
दो चरणों में 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए झारखंड और एनटीपीसी के संयुक्त उपक्रम पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) ने पावर स्टेशन का काम भेल को सौंपा। पहले चरण में 800 मेगावाट की तीन यूनिटों से कुल 2400 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा। पहली यूनिट से 680 मेगावाट बिजली झारखंड को मिलेगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से 85 प्रतिशत बिजली राज्य को मिलेगी। छह-छह महीने में यूनिटों से उत्पादन शुरू होगा।

2. नॉर्थ कर्णपुरा थर्मल पावर प्लांट
यहां 660 मेगावाट की तीन इकाइयों से कुल 1980 मेगावाट बिजली उत्पादन होना है। पहली यूनिट से 160 मेगावाट बिजली झारखंड को मिलने लगी है। दूसरी यूनिट से अगले वर्ष फरवरी में और 160 मेगावाट मिलेगी। परियोजना पूरी होने पर 500 मेगावाट बिजली मिलेगी। इसके अलावा रांची में गेतलसूद डैम पर 100 मेगावाट का सोलर फ्लोटिंग और करीब 400 मेगावाट अडानी पावर से भी मिलने की संभावना है।

डेडलाइन पूरी करने का बना है रोडमैप
पीएम हर तीन महीने पर दोनों परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं। हर हाल में तय समय में आपूर्ति शुरू करने के लक्ष्य का रोडमैप बनाया गया है। सीएम हेमंत सोरेन भी हर स्तर पर कार्य करने का निर्देश दे रहे हैं। एक दिन पहले ही 400 केवी का तेनुघाट जीआईएस तैयार कर चार्ज कर दिया गया है।

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