चिराग योजना: मनोहर सरकार प्रदेश के सभी बच्चों को समान और बेहतर शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध

चंडीगढ़, 20 जुलाई। हरियाणा सरकार प्रदेश के सभी बच्चों को समान एवं बेहतर शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए कक्षा दूसरी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ने का समान अवसर प्रदान किया जा रहा है। योजना के तहत कक्षा दूसरी से पांचवीं तक प्रति छात्र 700 रुपये, कक्षा छठी से आठवीं तक प्रति छात्र 900 रुपये एवं कक्षा नौवीं से बारहवीं तक प्रति छात्र 1100 रुपये प्रति माह की दर से प्रतिपूर्ति राशि या फार्म 6 में घोषित शुल्क राशि, जो भी कम होगी वह विद्यालयों को अदा की जाएगी। प्रदेश में वर्तमान में सभी सरकारी विद्यालयों में कक्षा पहली से बारहवीं तक कोई फीस नहीं ली जाती। वहीं कक्षा पहली से आठवीं तक वर्दी, पाठ्य-पुस्तकें, कार्य पुस्तकें, स्टेशनरी, स्कूल बैग एवं दोपहर का भोजन निशुल्क उपलब्ध करवाया जा रहा है।

Haryana govt chirag scheme to provide better education to all students

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश के इस बार के बजट (2022-23) में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक अकेले शिक्षा के क्षेत्र पर खर्च किए जा रहे हैं। इसी के तहत प्रदेश सरकार सभी बच्चों को समान शिक्षा का अधिकार प्रदान करने के लिए नई-नई योजनाएं व कार्यक्रम शुरू कर रही है। (चिराग) योजना भी प्रदेश के गरीब अभिभावकों के बच्चों के लिए शुरू की गई ऐसी ही योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत निजी विद्यालयों की सहमति से ऐसे बच्चों जिनके माता-पिता/ अभिभावकों की वार्षिक सत्यापित आय 1 लाख 80 हजार रुपये से कम है और वे बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे हैं उनके दाखिले इन निजी विद्यालयों में कक्षा दूसरी से बारहवीं तक किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि (चिराग) योजना के तहत कक्षा दूसरी से पांचवीं तक प्रति छात्र 700 रुपये, कक्षा छठी से आठवीं तक प्रति छात्र 900 रुपये एवं कक्षा नौवीं से बारहवीं तक प्रति छात्र 1100 रुपये प्रति माह की दर से प्रतिपूर्ति राशि या फार्म 6 में घोषित शुल्क राशि, जो भी कम होगी वह विद्यालयों को अदा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत प्रदेश के 381 निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों द्वारा 24987 सीटों पर छात्रों को दाखिले देने की प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि राज्य में निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के सेक्शन 12 (1) (c) को पूर्णतः लागू करते हुए सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में कक्षा पहली या इससे पूर्व की कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटों पर कमजोर वर्ग से संबंधित विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान अलग से किया गया है। मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में सभी सरकारी विद्यालयों में कक्षा पहली से बारहवीं तक कोई फीस नहीं ली जाती। अंग्रेजी माध्यम के बैग फ्री संस्कृति माडल विद्यालयों में ऐसे सभी विद्यार्थियों जिनके जिनके माता-पिता/ अभिभावकों की वार्षिक सत्यापित आय 1 लाख 80 हजार रुपये से कम है उनके लिए भी निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था है। 1 लाख 80 हजार रुपये से ऊपर की सालाना आमदन वाले परिवारों के बच्चों से नाममात्र मासिक अंशदान लिया जाता है।

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