पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को हरियाणा कैबिनेट ने दी मंजूरी
Haryana पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को हरियाणा कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार, शहरी स्थानीय निकायों में मेयर, चेयरमैन के कुल पदों में 8% बीसी-ए के लिए आरक्षित होंगे।

हरियाणा में विधानसभा और लोकलभा चुनाव होने में डेढ़ साल से कम का भी वक्त बचा है। ऐसे में पिछड़ा वर्ग वोट बैंक को साधने के लिए प्रदेश सरकार ने तैयारी कर ली है। पंचायतों के बाद शहरी स्थानीय निकायों में भी अब पिछड़ा वर्ग-ए (बीसी-ए) को आरक्षण देने की योजना बन गई है। पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को हरियाणा कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार, शहरी स्थानीय निकायों में मेयर, चेयरमैन के कुल पदों में 8% बीसी-ए के लिए आरक्षित होंगे।
पार्षद पद के लिए आरक्षण निकाय क्षेत्र में बीसी-ए की आबादी के अनुसार तय होगा। जिस निकाय में एससी आबादी 50% या अधिक है तो वहां बीसी-ए को उनकी आबादी के प्रतिशत के बावजूद आरक्षण नहीं मिलेगा। निकाय में बीसी-ए को कम से कम एक सीट के लिए उसकी आबादी 2% या इससे अधिक होना जरूरी है।
बीसी-ए के लिए इस प्रकार आरक्षित सीटों की संख्या को अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या के साथ जोड़ने पर यदि उनकी कुल संख्या नगर निकायों की कुल सीटों के 50 प्रतिशत से अधिक हो जाती है तो पिछड़े वर्ग (ए) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या को वहीं तक रखा जाएगा, जिससे कि अनुसूचित जाति और बीसी (ए) का आरक्षण नगर पालिका, नगर परिषद व नगर निगम के सदस्य की कुल सीटों के 50 प्रतिशत से अधिक न हो।
जहां अनुसूचित जाति की जनसंख्या शहरी स्थानीय निकाय की जनसंख्या का 40 प्रतिशत है तथा शहरी स्थानीय क्षेत्र में 10 सीटें हैं तो अनुसूचित जाति के लिए 4 सीटें आरक्षित होंगी, शेष एक सीट पिछड़ा वर्ग ब्लॉक के लिए उपलब्ध होगी। पिछड़ा वर्ग ब्लॉक-ए के नागरिकों को नगर पालिका में एक सीट मिलेगी, भले ही उनके लिए उपलब्ध आरक्षण के प्रतिशत के अनुसार कोई सीट उपलब्ध न हो, बशर्ते कि संबंधित शहरी स्थानीय क्षेत्र में उनकी आबादी 2 प्रतिशत से कम न हो।












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