Jharkhand: मुख्यमंत्री सारथी योजना तहत मिलेंगे 1500 रुपये प्रतिमाह, राज्य के 80 प्रखंडों में शुरु होगी
मालूम हो कि असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का निबंधन कराया जा रहा है. अब सरकार के द्वारा उनको चिकित्सा प्रतिपूर्ति भी मिल रही है।

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को भोजनावकाश के बाद सदन में श्रम विभाग की अनुदान मांग पर चर्चा हुई। विपक्ष ने सरकार के जवाब का वहिष्कार किया। विपक्ष के बहिष्कार के बीच वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए श्रम विभाग की 985 करोड़ रुपये की अनुदान मांग पारित हुई। चर्चा का जवाब देते हुए श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने कहा कि हमारी सरकार रोजगार के नाम पर हाथी नहीं उड़ाते बल्कि धरातल पर काम करते हैं। राज्य के 80 प्रखंडों में मुख्यमंत्री सारथी योजना अप्रैल से शुरू की जा रही है।
बेरोजगार युवक-युवतियों को मिलेगा भत्ता
इसके तहत एक साल के लिए बेरोजगार युवकों को एक हजार प्रतिमाह और युवतियों को डेढ़ हजार रुपये प्रतिमाह दिया जाएगा। कहा कि हमारी सरकार ने 16 जुलाई को 11 हजार युवक युवतियों को रोजगार दिया। बंद पड़ी आईटीआई को चालू कराया। मंत्री ने कहा कि नियोजन विधेयक 2021 के तहत निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत नौकरी स्थानीय को निजी क्षेत्र में देंगे। मजदूर हित में काम हो रहा है। मजदूरों की लाश लाने के लिए 50000 की व्यवस्था की। सभी जगहों से कोविड में मजदूर लाए गए।
झारखंड में नहीं छिपी उर्जा विभाग की स्थिति
वहीं भाजपा विधायक ढुलू महतो ने कहा कि वर्तमान समय में ऊर्जा विभाग की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। राज्य में स्थिति खराब है। दो तीन घंटे बिजली रहती है। दो साल से 80 पावर ग्रिड शुरू नहीं हो पाया। कमी विभाग में है या सरकार की इच्छा शक्ति में है। गर्मी आ रहा बिजली व्यवस्था सुधरे।
झारखंड में विकराल है पेयजल की समस्या
पानी की समस्या दूर किया जाए। सरकार जमीन पर काम नहीं उतार रहा। बिजली की व्यवस्था सुधारे। रघुवर सरकार में एक घंटे में तार गिरने पर काम होता था, अब पांच पांच दिन लग जाते हैं। ऊर्जा विभाग के अधिकारी मामले को देखें। ढुलू ने कहा कि धनबाद में कोयला का अवैध खनन हो रहा है। एक ही जगह पर अवैध खनन में 300 आदिवासी मारे गए, लेकिन उन्होंने आवाज उठायी तो उन्हें जेल भेज दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संरक्षण में कोयले की तस्करी हो रही है।
लोबिन ने लगाया सदन में नहीं बोलने देने का आरोप
झारखंड विधानसभा में श्रम विभाग की अनुदान मांग पर चर्चा के दौरान झामुमो विधायक लोबिन हेंब्रम ने अपनी ही सरकार को घेरा। लोबिन ने कहा कि मैं आहत हूं कि बजट सत्र में मुझे बोलने नहीं दिया गया। पेसा पर मेरा सवाल था, तब मंत्री ने गोलमटोल जवाब दिया था। तब कहा गया था की चलते सत्र में उन्हें स्पष्ट जवाब दिया जायेगा, लेकिन दो दिन ही बचे हैं। अबतक सरकार की तरफ से जवाब नहीं आया।
मजदूरों के संदर्भ में क्या सुधार किए गए हैं
माले विधायक विनोद सिंह ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के संदर्भ में सरकार ने व्यापक सुधार किए हैं, लेकिन इसमें दो-तीन सुधार की जरूरत है। प्रवासी मजदूरों के लिए देशव्यापी कानून बने। झारखंड के कई मजदूर विदेशों में काम कर रहे हैं, उनका बीमा जरूरी है। न्यूनतम मजदूरी का कानून बने। सरकार खुद न्यूनतम मजदूरी नहीं दिला पाती। ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि कितने सरकारी लोगों पर न्यूनतम मजदूरी नहीं देने के कारण कार्रवाई हुई।












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