मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बोले, भाजपा सरकार भी तो लगाती रही है, केंद्र का कानून है, बीजेपी खत्म करा दे

छत्तीसगढ़ के 31 जिलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून-रासुका लगाने की अधिसूचना पर विपक्ष खासकर भाजपा ने कड़ी आपत्ति की है।

bhupesh baghel

रायपुर: छत्तीसगढ़ के 31 जिलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून-रासुका लगाने की अधिसूचना पर विपक्ष खासकर भाजपा ने कड़ी आपत्ति की है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने रविवार को कहा, रासुका कांग्रेस सुरक्षा कानून है, यह लोकतंत्र विरोधी कानून है। भाजपा इसे लेकर एक रैली करने वाली है। इन आपत्तियों पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, भाजपा भी तो इसे लागू करती रही है। यह केंद्र सरकार का कानून है। केंद्र में भाजपा की ही सरकार है वहां कहकर भाजपा नेता इसे खत्म करा दें।

बालोद रवाना होने से पहले रायपुर पुलिस लाइन हेलीपैड में प्रेस से बात करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, यह देश का कानून है। खत्म करा दें, केंद्र में उनकी सरकार है। क्यों नहीं खत्म करा देते। वे कहते हैं धर्मांतरित हो चुके आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का लाभ नहीं मिलना चाहिए। यहां रैली करते हैं, लेकिन केंद्र में इनकी सरकार है, सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है तो लाते क्यों नहीं कानून। मुख्यमंत्री ने कहा, धर्मांतरण का विषय केवल एक राज्य में नहीं है, सभी राज्याें में है। केंद्र से कानून लाएं उनको रोक कौन रहा है। आपने 370 हटाया, हो गया ना। नोटबंदी लाए, जीएसटी लाए हो गया तो यह भी कर लो। यहां रैली करने का क्या मतलब है। लोगों को भड़काने का क्या मतलब है।

भाजपा को लोगों को लड़ाने में मजा आता है। सकारात्मक बात नहीं करते, जोड़ने की बात नहीं करते। ये केवल तोड़ने की बात करते हैं, लड़ाने की बात करते हैं। सीएम बघेल ने कहा, भाजपा हर चीज को ऐसे परोसना चाहती है जैसे यह पहली बार हो रहा है। हमने विधानसभा में कोई कानून पारित किया है, कि मंत्रिमंडल का कोई फैसला है-उसके बारे में बात करें। यह तो रिनीवल है। इनके पास कोई मुद्दा नहीं है। अब कह रहे हैं कि तुम्हारे खिलाफ रासुका लगाएंगे। किसके खिलाफ रासुका लगा है भाई। मुख्यमंत्री बोले, अभी इनको (भाजपा) फिर बत्ती पड़ी है कि जाओ छत्तीसगढ़ में कोई षड़यंत्र करो। छत्तीसगढ़ में शांति क्यों है, छत्तीसगढ़ के लोग खुशहाल क्यों हैं, छत्तीसगढ़ में अमन-चैन क्यों है, सब वर्गों में समृद्धि कैसे आ रही है यह भाजपा को बिल्कुल पच ही नहीं रहा है। इस कारण से ये नये-नये शिगुफा लेकर आ रहे हैं।

पहली बार नहीं लागू हुआ है रासुका

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, अरुण साव जी वकील हैं। रमन सिंह 15 साल तक मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। रासुका केंद्र सरकार का कानून है। हर छह महीने में उसको रिनीवल करते हैं। मुझे भी इसकी जानकारी नहीं थी। मैंने पूछा तो पता चला कि यह हर चार-छह महीने पर होता है। दूसरे प्रदेशों में भी ऐसा होता है। कौन से प्रदेश में नहीं हुआ है यह भी बताइए। भाजपा शासित राज्यों में नहीं है क्या? यह केंंद्र का कानून है। हर छह महीने में डीएम को यह अधिकार दिया जाता है। उसी के तहत दिया गया है। इसमें हाय तौबा क्यों मचा रहे हैं।

भाजपा के पास धर्मांतरण-साम्प्रदायिकता के अलावा कुछ नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा, भाजपा कुछ भी करे बस समाज के बीच विद्वेश फैलाने का काम न करें। उनके पास कोई मुद्दा है नहीं। 15 साल सरकार में थे पेसा नियम बना नहीं पाये। वन अधिकार कानून का क्रियान्वयन नहीं हो पाया। उनके समय महुआ सड़कों पर फेंका जाता था। जो आय के स्रोत थे उनको सब खत्म करते जा रहे थे। उनकी जमीन हड़पने का काम भाजपा शासनकाल में खूब हुआ। इन मुद्दों पर वे बात करें। सबसे अधिक चर्च उनके कार्यकाल में बने हैं। भाजपा इस सवाल का जवाब क्यों नहीं देती। मैं शुरू से बाेलता रहा हूं, इनके पास दो ही हथियार हैं एक धर्मांतरण और दूसरी साम्प्रदायिकता दूसरा इनको आता भी कुछ नहीं।

रमन सिंह बोले- लोकतंत्र विरोधी कानून

प्रदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किया गया है। इसे लेकर डॉ रमन सिंह ने कहा- रासुका कांग्रेस सुरक्षा कानून है, ये लोकतंत्र विरोधी कानून है। इसे असामान्य कानून व्यवस्था की परिस्थिति में लागू किया जाता है।आज कौन सी ऐसी असामन्य परिस्थिति हो गई। विधानसभा में कांग्रेस तो प्रदेश की कानून व्यवस्था को तो बेहतर बताती थी। क्या इनके नियंत्रण से कानून व्यवस्था बाहर हो गई जाे रासुका लागू कर रहे हैं। कांग्रेस ने एक धर्म विशेष के सामने समर्पण किया है, सोनिया गांधी के दबाव से आदिवासियों को कुचलने की नियत से रासुका लाया गया। छत्तीसगढ़ में रासुका के जरिए कांग्रेस आपातकाल लगा रही है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने एक बार फिर से आपातकाल लगाने की साजिश रची है।

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना और उनके इन्कार पर सवाल हुआ तो मुख्यमंत्री ने नसीहत दे दी। उन्होंने कहा, रमन सिंह पहले केंद्रीय मंत्री थे। फिर वे यहां आए। हम तो चाहेंगे कि खाली बैठे हुए हैं, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, उसको कहीं भेजा भी नहीं जाता तो केंद्र में मंत्री ही बन जाओ। मैं राज्यपाल बनने की बात नहीं कर रहा हूं। लेकिन केंद्रीय मंत्री बनोगे तो कुछ फायदा होगा छत्तीसगढ़ को। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हो तो कहीं जाओ भाई। हमको खराब लगता है कि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और बगल के चुनाव में भी नहीं भेजा जाता उन्हें। कोई काम ही नहीं है। यही बांध देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, भाई जो प्रदेश उपाध्यक्ष का काम है वह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष करे तो यह अच्छा नहीं लगता ना। अब फिर से अंगूर खट्‌टे हो गये। पूरे देश में हल्ला है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल हो रहा है और रमन सिंह पहले ही वॉकआउट कर गए। वहां नंबर नहीं लग रहा है, यहां पुरंदेश्वरी से लेकर सारे लोग बोल दिए कि वह छाेटा दावेदार भी नहीं हैं। छह महीने बचे हैं, पूर्व मुख्यमंत्री को पार्टी का चेहरा भी नहीं बनाये हैं। सहानुभूति तो होती ही है ना, इतने दिन काम किया है साथ में।

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