छत्तीसगढ़ सरकार ने खत्म किया वजीफा प्रावधान, सरकारी कर्मचारियों को पहले महीने से ही मिलेगा पूरा वेतन

सरकार ने कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी और चौथे साल से उन्हें पूरा वेतन देने का फैसला किया।

छत्तीसगढ़ में बघेल सरकार ने विधानसभा चुनाव (Chhattisgarh Polls 2023) से पहले वजीफा प्रावधान को रद्द कर दिया है, जिससे राज्य के 38 हजार से अधिक सरकारी कर्मचारियों को फायदा होने वाला है। दरअसल इस प्रावधान के अंतर्गत भर्ती के चार साल बाद कर्मचारियों को पूरा वेतन मिलता था लेकिन अब पहले महीने से ही कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया जाएगा।

रायपुर, पीटीआई। छत्तीसगढ़ सरकार ने वजीफा प्रावधान (Stipend Provision) को रद्द कर दिया है, जिसमें भर्ती के चार साल बाद सरकारी कर्मचारी को पूरा वेतन मिलता था। एक अधिकारी ने रविवार को इस बात की जानकारी दी है। इसको लेकर सीएम भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट भी शेयर किया है। आज राजीव युवा मितान सम्मेलन में सरकारी नौकरी में नई नियुक्तियों के लिए 70, 80, 90 प्रतिशत स्टाइपेंड समाप्त करने की घोषणा की है।

Chhattisgarh govt abolished stipend

8000 से अधिक कर्मचारियों को होगा फायदा
जनसंपर्क विभाग के अधिकारी ने कहा कि इस कदम से लगभग 38,000 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को फायदा होगा। राज्य कांग्रेस सरकार का यह कदम इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आया है।

अधिकारी ने बताया कि शनिवार को राजीव युवा मितान सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वजीफा प्रावधान समाप्त करने की घोषणा की है। साथ ही, इसके संबंध में एक निर्णय को राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी।

चौथे साल में मिलता था पूरा वेतन
2020 में लागू हुए वजीफा नियम (Stipend Provision) के तहत, सीधी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले, दूसरे और तीसरा वर्ष लगातार मूल वेतनमान का 70 प्रतिशत, 80 प्रतिशत और 90 प्रतिशत का वजीफा मिलने का प्रावधान किया गया था। अधिकारी ने कहा, "नियमानुसार नियुक्ति के चौथे साल से पूरा वेतन दिया जाता था।"

सरकार ने कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी और चौथे साल से उन्हें पूरा वेतन देने का फैसला किया। सीधी भर्ती प्रक्रिया से नियुक्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पहले वर्ष में मूल वेतनमान का 70 प्रतिशत वजीफा मिलता था, जो दूसरे वर्ष में बढ़कर 80 प्रतिशत और तीसरे वर्ष में 90 प्रतिशत हो जाता है।

चुनावी साल में बघेल सरकार का दाव
रायपुर स्थित एक राजनीतिक विशेषज्ञ ने कहा कि वजीफा नियम आगामी विधानसभा चुनावों में एक मुद्दा बन सकता है और चुनाव से पहले कर्मचारियों और उनके परिवारों को लुभाने के लिए इसे समाप्त करके एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

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