आंध्र प्रदेश: प्रकाशम जिले में क्यों दिलचस्प होते जा रहे हैं सियासी समीकरण
आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम समय बचा है और ऐसे में प्रकाशम जिले में राजनीतिक समीकरण दिलचस्प मोड़ लेते हुए नजर आ रहे हैं।
प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी वाईएसआरसी और विपक्षी टीडीपी दोनों को ही यहां असंतोष का सामना करना पड़ रहा है और जिसके चलते उनकी चुनावी संभावनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर जिलों के पुनर्गठन के बाद वाईएसआरसी को प्रकाशम की आठ विधानसभा सीटों में से सात सीटें मिली हैं। वाईएसआरसी को मिली सीटों में ओंगोल, संथानुथलापाडु, दारसी, कनिगिरी, मार्कपुर, गिद्दलुर और येरागोंडापलेम शामिल हैं, जबकि टीडीपी के हिस्से में एकमात्र कोंडेपी सीट गई।
मरकापुर और गिद्दलुर में मौजूदा विधायकों के खिलाफ वाईएसआरसी के भीतर खुला असंतोष है। यहां तक कि पार्टी के नए उभरते नेताओं ने भी खुलेआम विधायकों की उम्मीदवारी का विरोध करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाने शुरू कर दिए हैं।
मरकापुर में वाईएसआरसी नेता पेद्दीरेड्डी सूर्यप्रकाश रेड्डी ने विधायक केपी नागार्जुन रेड्डी और उनके भाई कृष्णमोहन रेड्डी के खिलाफ एसपी में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी की और यहां तक कि उन्हें खत्म करने की साजिश भी रची।
विधायक अन्ना रामबाबू, जिन्होंने 2019 में टीडीपी के एम अशोक रेड्डी के खिलाफ 68,000 वोटों के प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की, उन्हें भी गिद्दलुर में अपने ही नेताओं के गंभीर विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
असंतोष से भलीभांति परिचित रामबाबू ने अपने विरोधियों पर पलटवार भी किया है। साथ ही विधायक ने ऐलान भी किया है कि अगर उन्हें टिकट नहीं मिला तो वह आगामी चुनाव में जिसे भी टिकट मिलेगा, उसकी जीत के लिए पूरी ईमानदारी से काम करेंगे।
दूसरी ओर हाल ही में नियुक्त किए गए वाईएसआरसी के समन्वयक भुमना करुणाकर रेड्डी और बीदा मस्तान राव लगातार जिले का दौरा कर रहे हैं और उनके बीच समन्वय को बढ़ावा देकर 2024 में 'मिशन 175' को पूरा करने के लिए सभी प्रमुख नेताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं।












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