Andra Pradesh: पलनाडु में कचरे से सोना निकालने का प्रयास, ये है प्लान

गुंटूर, 18 जून। आंध्र प्रदेश में नवगठित पलनाडु जिले के कई गांव जैविक खेती में इस्तेमाल होने वाले जैव-उर्वरक बनाने के लिए अपने दैनिक कचरे का उपयोग कर रहे हैं। जिले की 527 पंचायतों में से 405 ने वर्मीकम्पोस्ट इकाइयाँ स्थापित की हैं। जिनमें से 363 ने कचरे को उर्वरक में बदलने के लिए ऑपरेशन भी शुरू कर दिया है।

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स्वच्छ आंध्र प्रदेश परियोजन के तहत आंध्र प्रदेश के सभी 28 मंडलों में विशेष अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। वहीं राज्य में तैनात करीब 1,501 कर्मचारी घर-घर से कचरा इकट्ठा करते हैं और बायोडिग्रेडेबल गीले कचरे को वर्मीकम्पोस्ट शेड में स्थानांतरित करने से पहले उन्हें अलग करते हैं। गीले कचरे को गोबर, नारियल के रेशे और केंचुओं के साथ शेड में स्थापित बड़े टबों में 45-50 दिनों के लिए विघटित किया जाता है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विघटित उत्पाद में 1.3-2 प्रतिशत नाइट्रोजन, 0.5-1.5 प्रतिशत फास्फोरस, 0.4-0.8 प्रतिशत पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्व होते हैं। रोमपिचेरला मंडल के विशेष अधिकारी दीप्ति ने बताया कि वर्मीकम्पोस्ट का उत्पादन अब तक 160 गांवों में किया जा रहा है। इसके उत्पादन में 15 रुपये प्रति किलोग्राम कीमत निर्धारित की जाती है। किसानों को 2 किलो, 5 किलो और 10 किलो दिया जाता है। अब पलनाडु जिला प्रशासन ने आरबीके के माध्यम से वर्मीकम्पोस्ट बेचने का फैसला किया है।

कलेक्टर शिवरामकृष्ण ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने और इसके विपणन में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अब तक 18,175 किलोग्राम वर्मीकम्पोस्ट का उत्पादन और बिक्री की जा चुकी है। इससे राज्य को 1.85 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। संयुक्त निदेशक (कृषि) मुरली ने कहा कि जैसा कि और अधिक वर्मीकम्पोस्ट इकाइयों के जल्द ही संचालन शुरू होने की उम्मीद है।

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