पंजाब: विपक्षी दलों की मीटिंग के बाद आम आदमी पार्टी का बयान आया सामने
बिहार के पटना में आज विपक्षी दलों की अहम बैठक हुई जिसमें कई पार्टियों के नेताओं सहित दिल्ली सी.एम. अरविंद केजरीवाल व पंजाब सी.एम. भगवंत मान ने हिस्सा लिया। इस दौरान विपक्ष दलों की मीटिंग के बाद 'आप' का बयान सामने आया है। पटना में हुई विपक्ष की इस बैठक में 15 दल शामिल हुए। इनमें कांग्रेस को छोड़कर 11 दलों ने केंद्र के अध्यादेश को लेकर 'आप' का समर्थन किया है।
इस दौरान 'आप' ने कहा कि काले अध्यादेश का उद्देश्य केवल दिल्ली में एक निर्वाचित सरकार के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनना नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक सिद्धांतों के लिए भी खतरा है। यदि चुनौती न दी गई, तो यह खतरनाक प्रवृत्ति अन्य सभी राज्यों में फैल सकती है, जिसके परिणामस्वरूप लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राज्य सरकारों से सत्ता छीन ली जा सकती है। इस काले अध्यादेश को हराना जरूरी है।

पटना में समान विचारधारा वाली पार्टी की बैठक में कुल 15 पार्टियां शामिल हो रही हैं, जिनमें से 12 का प्रतिनिधित्व राज्यसभा में है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को छोड़कर, अन्य सभी 11 दलों ने काले अध्यादेश के खिलाफ स्पष्ट रूप से अपना रुख व्यक्त किया है और घोषणा की है कि वे राज्यसभा में इसका विरोध करेंगे।
कांग्रेस, एक राष्ट्रीय पार्टी जो लगभग सभी मुद्दों पर एक स्टैंड लेती है, ने अभी तक काले अध्यादेश पर अपना रुख सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि, कांग्रेस की दिल्ली और पंजाब इकाइयों ने घोषणा की है कि पार्टी को इस मुद्दे पर मोदी सरकार का समर्थन करना चाहिए। आज पटना में समान विचारधारा वाली पार्टी की बैठक के दौरान कई दलों ने कांग्रेस से काले अध्यादेश की सार्वजनिक रूप से निंदा करने का आग्रह किया। हालांकि, कांग्रेस ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
कांग्रेस की चुप्पी उसके इरादों पर संदेह पैदा करती है। व्यक्तिगत चर्चाओं में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी अनौपचारिक या औपचारिक रूप से राज्यसभा में इस पर मतदान से दूर रह सकती है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के मतदान से दूर रहने से भाजपा को भारतीय लोकतंत्र पर अपने हमले को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी।












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