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Makar sankranti 2025: क्या है मकर संक्रान्ति का अर्थ? क्यों उड़ाते हैं आज 'पतंग'?

Makar sankranti 2025 (क्यों उड़ाते हैं पतंग?): आज पूरा देश संक्रान्ति का त्योहार मना रहा है, जब सू्र्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो 'मकर संक्रान्ति' मनाई जाती है, जिसे कि 'उत्तरायण' के नाम से भी जाना जाता है। आज से दिन बड़े होते हैं, सूर्य का ताप बढ़ने लगता है और मांगलिक काम शुरू हो जाते हैं।

आज के दिन किसानों को अपने खेतों से नई फसल मिलती है, जिसका जश्न वो आज के दिन मनाते हैं। ऐसा करके वो धरती माता और सूर्य देव का शुक्रिया अदा करते हैं।

Makar sankranti 2025

भारतीय लोग ( खासकर के उत्तर भारत) के निवासी आज के दिन स्नान-दान करके 'खिचड़ी' खाते हैं और उसके बाद पंतग उड़ाते हैं। बनारस में पतंग को ' गुड्डी' के नाम से पुकारते हैं।

मकर संक्रान्ति पर पतंग उड़ाने की परंपरा क्‍यों है ?(Makar sankranti 2025)

मकर संक्रांति में पतंग उड़ाने की प्रथा है, सूर्य के प्रकाश में चमकते आकाश में जब रंग-बिरंगी पतंगें उड़ती हैं तो वो नजारा देखते ही बनता है। इस परंपरा का सीधा संबंध मनुष्य के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। सूर्य आज तेज होता है, जिससे लोगों को सर्द मौसम में गर्माहट मिलती है जो कि शरीर के लिए बहुत जरूरी है। पंतग उड़ाने से लोगों को 'विटामिन डी' की प्राप्ति होती है।

पतंग उड़ाकर देवताओं का आभार व्यक्त किया जाता है(Makar sankranti 2025)

वैसे पौरणिक मान्यता के मुताबिक पतंग उड़ाकर देवताओं का आभार व्यक्त किया जाता है और उनका स्वागत किया जाता है। माना जाता है कि छह महीने की अवधि के बाद आज के दिन देवता जागते हैं और इसी कारण मांगलिक काम आज से प्रारंभ होते हैं।

आज का दिन भाईचारे और एकता का प्रतीक है (Makar sankranti 2025)

अगर सामाजिक महत्व की बातें करें तो आज का दिन भाईचारे और एकता का प्रतीक है। लोग गिले-शिकवे भूलकर साथ में पतंग उड़ाते हैं और आपसी प्रेम का परिचय देते हैं। सच मायने मे पतंग उड़ाना आनंद, विजय, और उन्नति का मानक है।

भगवान राम ने सबसे पहले मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाई थी(Makar sankranti 2025)

तमिल रामायण के मुताबिक, भगवान राम ने सबसे पहले मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाई थी। तब से ही ये परंपरा बन गई और लोग उत्तरायण के दिन पतंग उड़ाने लग गए।

क्या है मकर संक्रान्ति का मतलब? (Makar sankranti 2025)

मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, इसी वजह से इसे मकर संक्रान्ति कहते हैं। सूर्य और शनि का मिलन एक सकारात्मक संदेश है। आज से खरमास , जिसे कि अपवित्र वक्त कहते हैं, उसका अंत होता है। उत्तरायण के शुभ काल की शुरुआत होती है। ये सकारात्मक ऊर्जा का भी पाठ पढ़ाता है।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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