Sehri Ki Niyat Kya Hai: सेहरी की दुआ क्या है? रोजा रखने की सही नीयत और दुआ- मतलब समझें तो बरकत!
Sehri Ki Niyat Kya Hai, 21 February 2026: रमजान-उल-मुबारक 2026 शुरू हो चुका है। यह महीना रोजेदारों के लिए इबादत, सब्र, आत्मचिंतन और अल्लाह से करीब होने का सुनहरा मौका है। रोजा सिर्फ भूख-प्यास सहना नहीं, बल्कि दिल और रूह की सफाई भी है।
सेहरी (सुहूर) के समय रोजे की नीयत और दुआ पढ़ना बहुत अहम है - इससे रोजे में बरकत आती है, ताकत मिलती है और इबादत कबूल होने की उम्मीद बढ़ती है।

Sehri Ki Dua-Niyat Ka Tarika: सेहरी की दुआ और नीयत का सही तरीका
सेहरी के दौरान रोजा रखने की नीयत दिल से करें। नीयत का मतलब है मन में पक्का इरादा करना कि मैं अल्लाह की रजा के लिए रमजान का फर्ज रोजा रख रहा हूं।
सबसे आम और सुन्नत दुआ (नीयत की दुआ):
- दुआ: व बिसौमि गदिन नवयतु मिन शह्रि रमजान
- दुआ रोमन में में समझें- Wa bisawmi ghadin nawaiytu min shahri Ramadan.
- दुआ का हिंदी में मतलब है:- मैंने कल रमजान के महीने का रोजा रखने की नीयत की। यह इरादा सच्चाई और ईमानदारी से करना चाहिए।
- अन्य सुन्नत रूप (अधिक स्पष्ट): मैंने अल्लाह तआला के लिए इस साल रमजान के फर्ज रोजे की कल नीयत की।
Sehri Ki Khaas Baat: महत्वपूर्ण बातें:
- दुआ पढ़ना जरूरी नहीं: दिल में सच्ची नीयत काफी है। अगर दुआ भूल गए या नहीं पढ़ी, तो भी रोजा सही रहेगा (अगर इरादा साफ है)।
- नीयत का समय: सेहरी से लेकर फज्र अजान शुरू होने तक। फज्र शुरू होते ही रोजा शुरू हो जाता है।
- बरकत का राज: हदीस में है कि सेहरी में बरकत है (सही बुखारी)। सेहरी करना सुन्नत-ए-मुअक्कदा है - इससे रोजेदार को ताकत मिलती है और दिनभर सब्र आसान होता है।
Ramadan Dua Importance: रमजान में दुआ का खास महत्व
रमजान में दुआएं ज्यादा कबूल होती हैं। सेहरी की दुआ रोजे की शुरुआत को अल्लाह से जोड़ती है - यह शुक्र, सब्र और तवक्कुल सिखाती है। रोजा रखना सिर्फ शरीर का नहीं, दिल और नीयत का अमल है। सही नीयत से रोजा कबूल होने की उम्मीद बढ़ती है।
रमजान मुबारक! अल्लाह सबके रोजे कबूल फरमाए और सेहरी-दुआ में बरकत दे। (नोट: दुआ विश्वसनीय इस्लामी सोर्स जैसे IslamicFinder, Hamariweb, UrduPoint आदि पर आधारित है। उलेमा से कन्फर्म करें।)












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