Second Mangala Gauri Vrat 2023: आज है मंगला गौरी का व्रत, थोड़ी देर में है पूजा का शुभ-मुहूर्त
Second Mangala Gauri Vrat 2023 Muhurat: आज सावन महीने का दूसरा मंगला गौरी व्रत है। कहते हैं कि जिनका वैवाहिक जीवन सुखी नहीं है या फिर जिसे अभी तक अपना लाइफ पार्टनर नहीं मिला है, वो लोग आज अगर ये व्रत करें तो उनकी समस्या का समाधान जल्दी हो जाता है। कुंवारी कन्याएं शिव जी जैसे पति को पाने के लिए आज का व्रत करती हैं।

माना जाता है कि पार्वती मां कई वर्षों तक इस व्रत को करने के बाद शिव को पति के रूप में पाया था। इस बार सावन में 9 मंगला गौरी का उपवास आया है क्योंकि अधिकमास के कारण इस बार सावन 59 दिनों का जो है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
मां की पूजा तो दिन के किसी भी प्रहर हो सकती है लेकिन शुभमुहूर्त निम्नलिखित है...
- अभिजीत मुहूर्त: 11: 59 AM - 12: 54 PM
- विजय मुहूर्त: 02: 45 PM - 03: 40 PM
- सर्वार्थ सिद्धि योग: 05: 31PM - 07: 04 PM
पूजा विधि
- सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- फिर व्रत का संकल्प लें।
- शुभ मुहूर्त में पूजा करें।
- सुहागिन महिलाएं पूजा करने से पहले स्वयं 16 श्रृंगार करें और फिर मंगला माता का भी सोलह श्रृंगार करें।
- मां के सामने 16 आटे की लोई में घी के दीए जलाएं।
- इस पूजा में इस्तेमाल होने वाली हर चीज 16 होनी चाहिए।
- कथा सुनें, आरती करें और प्रसाद बांटने के बाद पारण करें।
गौरी जी की आरती
- जय अम्बे गौरी,
- मैया जय श्यामा गौरी ।
- तुमको निशदिन ध्यावत,
- हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- मांग सिंदूर विराजत,
- टीको मृगमद को ।
- उज्ज्वल से दोउ नैना,
- चंद्रवदन नीको ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- कनक समान कलेवर,
- रक्ताम्बर राजै ।
- रक्तपुष्प गल माला,
- कंठन पर साजै ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- केहरि वाहन राजत,
- खड्ग खप्पर धारी ।
- सुर-नर-मुनिजन सेवत,
- तिनके दुखहारी ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- कानन कुण्डल शोभित,
- नासाग्रे मोती ।
- कोटिक चंद्र दिवाकर,
- सम राजत ज्योती ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- शुंभ-निशुंभ बिदारे,
- महिषासुर घाती ।
- धूम्र विलोचन नैना,
- निशदिन मदमाती ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- चण्ड-मुण्ड संहारे,
- शोणित बीज हरे ।
- मधु-कैटभ दोउ मारे,
- सुर भयहीन करे ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- ब्रह्माणी, रूद्राणी,
- तुम कमला रानी ।
- आगम निगम बखानी,
- तुम शिव पटरानी ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- चौंसठ योगिनी मंगल गावत,
- नृत्य करत भैरों ।
- बाजत ताल मृदंगा,
- अरू बाजत डमरू ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- तुम ही जग की माता,
- तुम ही हो भरता,
- भक्तन की दुख हरता ।
- सुख संपति करता ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- भुजा चार अति शोभित,
- वर मुद्रा धारी । [खड्ग खप्पर धारी]
- मनवांछित फल पावत,
- सेवत नर नारी ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- कंचन थाल विराजत,
- अगर कपूर बाती ।
- श्रीमालकेतु में राजत,
- कोटि रतन ज्योती ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- श्री अंबेजी की आरति,
- जो कोइ नर गावे ।
- कहत शिवानंद स्वामी,
- सुख-संपति पावे ॥
- ॐ जय अम्बे गौरी..॥
- जय अम्बे गौरी,
- मैया जय श्यामा गौरी ।












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