Sankashti Chaturthi Aarti: 'सुखकर्ता दुखहर्ता...', पढ़ें बप्पा की आरती
Sankashti Chaturthi ki Aarti: सावन मास की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। कहते हैं इस दिन सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा करने से इंसान को सारे सुखों की प्राप्ति होती है और उसके सारे कष्ट दूर होती हैं। इस दिन मांएं अपने बच्चे की लंबी उम्र की कामना के लिए उपवास रखती हैं तो वहीं जिनकी गोद सूनी है, वो भी संतान प्राप्ति के लिए गणपति का व्रत रखती हैं।

इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा खास आरती के साथ करनी चाहिए, ऐसे करने से बप्पा काफी खुश होते हैं। आपको बता दें कि इस बार संकष्टी चतुर्थी 6 जुलाई को है।
'संकष्टी चतुर्थी' पर करें ये आरती
- सुखकर्ता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नांची|
- नुरवी; पुरवी प्रेम, कृपा जयाची |
- सर्वांगी सुंदर, उटी शेंदुराची|
- कंठी झळके माळ, मुक्ताफळांची॥१॥
- जय देव, जय देव जय मंगलमूर्ती|
- दर्शनमात्रे मन कामना पुरती ॥धृ॥
- रत्नखचित फरा, तुज गौरीकुमरा|
- चंदनाची उटी , कुमकुम केशरा|
- हिरेजडित मुकुट, शोभतो बरा |
- रुणझुणती नूपुरे, चरणी घागरिया|
- जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ॥२॥
- लंबोदर पीतांबर, फणिवरबंधना |
- सरळ सोंड, वक्रतुंड त्रिनयना|
- दास रामाचा, वाट पाहे सदना|
- संकटी पावावे, निर्वाणी रक्षावे, सुरवरवंदना|
- जय देव जय देव, जय मंगलमूर्ती|
- दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥
- जय देव जय देव, जय मंगलमूर्ती|
संकष्टी चतुर्थी की आरती कितने बजे होती है?
संकष्टी चतुर्थी की आरती सुबह या शाम हो सकती है।
संकष्टी चतुर्थी की आरती कितनी बार करनी चाहिए?
संकष्टी चतुर्थी की आरती दिन में एक बार होनी चाहिए।
संकष्टी चतुर्थी की आरती करने के नियम
आरती करते वक्त आपका मन और तन दोनों स्वच्छ होना चाहिए। आप नहा-धोकर स्वच्छ कपड़े पहनकर आरती करें।
संकष्टी चतुर्थी की पूजा कब और किस लिए करते हैं?
जो संतान सुख, यश, प्रेम और धन की इच्छा रखते है, वो संकष्टी चतुर्थी की पूजा करते हैं।

गणेश स्तुति मंत्र
- ॐ वक्रतुण्डाय नम:।
- ॐ हीं श्रीं क्लीं गौं ग: श्रीन्महागणधिपतये नम:।
- ॐ विघ्नेश्वराय नम:।
- गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जम्बूफलसार भक्षितम्।
- उमासुतं शोक विनाशकारणं, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्।












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