Raksha Bandhan 2021: जानिए क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, इतिहास, मंत्र और इस दिन क्या ना करें?

नई दिल्ली, 22अगस्त। आज है राखी, आपको बता दें कि सावन की पूर्णिमा के दिन भाई-बहन के प्रेम का त्योहार 'रक्षाबंधन' मनाया जाता है। आज भद्रा नहीं है और न ही किसी प्रकार का कोई ग्रहण है, भद्रा सुबह सवा छ बजे ही खत्म हो गया है, इसलिए इस वर्ष का 'रक्षाबंधन' शुभ संयोग वाला है और आज पूरे दिन आप इस पर्व का आनंद ले सकते हैं।

रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त

  • प्रातः 6:15 बजे के बाद से सुबह 7:51 तक
  • दोपहर 12:00 बजे से 14:45 तक
  • शाम 6 :31 बजे से 7:59 बजे तक
 राहु काल का योग

राहु काल का योग

खैर त्योहार पर भद्रा काल तो नहीं है लेकिन राहु काल का योग है और इस दौरान कोई भी काम नहीं करना चाहिए। इस बार राहुकाल शाम पांच बजकर 16 मिनट से 6 बजे तक है इसलिए इस दौरान कोई भी बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र ना बांधे।

राखी सावन का आखिरी दिन होता है

आपको बता दें कि राखी सावन का आखिरी दिन होता है और इस दिन के बाद से भाद्र माह की शुरुआत हो जाती है। वैसे तो ये पर्व भाई-बहनों के प्रेम का मानक है लेकिन राखी के दिन हमारे देश में ब्राह्मणों, गुरुओं, नेता और प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बांधी जाती है। देश में कहीं जगह वृक्ष को और भगवान को भी राखी बांधने की परंपरा है। इस दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरुष भाईचारे के लिये एक दूसरे को भगवा रंग की राखी बांधते हैं तो वहीं राजस्थान और हरियाणा में भाभीयों को भी राखी बांधी जाती है।

रक्षा सूत्र का अभियान

रक्षा सूत्र का अभियान

राखी के दिन ही हिमानी शिवलिंग आकार ग्रहण करते हैं और इसी वजह से इस दिन ही विश्वप्रसिद्ध अमरनाथ यात्रा भी पूरी होती है। राखी का त्योहार पड़ोसी देश नेपाल में भी मनाया जाता है। आप में से बहुत कम लोग जानते होंगे कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी राखी के पर्व का जिक्र है।गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने जगजागरण के रक्षा सूत्र का अभियान चलाया था।

वामनावतार ने भी राजा बलि के रक्षासूत्र बांधा था

तो वहीं कुछ पौराणिक कथाओं में 'रक्षासूत्र' का जिक्र है, जिसके अनुसार भगवान विष्णु के वामनावतार ने राजा बलि के 'रक्षासूत्र' बांधा था और उसके बाद ही उन्हें पाताल जाने का आदेश दिया था।

राखी बांधते समय करें इस मंत्र का उच्चारण

राखी बांधते समय करें इस मंत्र का उच्चारण

ओम यदाबध्नन्दाक्षायणा हिरण्यं, शतानीकाय सुमनस्यमाना:। तन्मSआबध्नामि शतशारदाय, आयुष्मांजरदृष्टिर्यथासम्।। कहा जाता है कि भगवान विष्णु के वामनावतार ने इसी मंत्र के साथ राजा बलि को रक्षासूत्र बांधा था।

प्रेम और विश्वास का प्रतीक है रक्षाबंधन

रक्षाबंधन है प्रतीक है प्रेम का, वचन का, किसी पर अटूट विश्वास का, किसी पर सबकुछ लुटा देने का। ये केवल धागा नहीं है बल्कि किसी की उम्मीद है जो लोग किसी की कलाई पर बांधते हैं।


भाई-बहन इस दिन ना करें ये काम

  • राहुकाल में राखी ना बांधे।
  • रक्षाबंधन के दिन काले वस्त्र ना धारण करें।
  • राखी बांधते वक्त भाई का सिर ढंका हो।
  • राखी बांधते वक्त भाई का मुख दक्षिण की ओर ना हो।
  • राखी बांधते वक्त भाई का मुख नार्थ या ईस्ट में होना चाहिए।
  • तिलक करते वक्त साबूत चावल का प्रयोग करें और ना कि टूटे।
  • शीशे का कोई भी उपहार भाई-बहन एक दूसरे को ना दें।

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