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तिरुपति बालाजी मंदिर आने वाले भक्‍तों को अपने साथ रखनी होगी लकड़ी की छड़ी, जानें क्‍यों?

तिरुमला की पहाड़ी पर स्थित पवित्र तिरुपति बालाजी मंदिर में आने वाले भक्‍तों को अब अपने साथ एक लकड़ी की छड़ी रखनी होगी। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने ये सलाह मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों को उनकी सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए दी है।

Tirupati Balaji Temple,

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    तिरुपति बालाजी मंदिर आने वाले भक्‍तों को अपने साथ रखनी होगी लकड़ी की छड़ी

    क्‍यों भक्‍ताें को साथ रखनी होगी लकड़ी

    बता दें आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति बालाजी मंदिर में हर दिन लाखों की संख्‍या में तीर्थयात्री आते हैं, इनमें बड़ी संख्‍या में भक्‍त कठिन पहाड़ी की पैदल चढ़ाई करके आते हैं। मंदिर ट्रस्‍ट ने इन्‍हीं भक्‍तों को सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए लकड़ी की छड़ी साथ में रखना जरूरी कर दिया है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने लड़‍की की छड़ी जंगली जानवरों से लड़ने और उनसे सुरक्षित रखने के लिए दी है।

    छह साल की लड़की को तेंदुए ने मार दिया था

    तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने ये सलाह पिछले सप्‍ताह तिरुपति बालाजी मंदिर में एक छह वर्षीय लड़की को तेंदुए द्वारा मार दिए जाने के बाद दिया है। जंगली जानवरों से बचने के लिए तिरूपति तीर्थयात्रियों को अब लकड़ी की छड़ी साथ रखनी होगी।

    पैदल तीर्थयात्रियों को 100 को झुंड के साथ जाना होगा

    जो छह साल की बच्‍ची के साथ हुआ वैसी घटना दोबारा ना हो इसलिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ने ये उपाय किए हैं। इसके साथ ही बालाजी मंदिर तक पैदल मार्ग से जाने वाले तीर्थयात्रियों को अब एक सुरक्षा गार्ड के साथ सौ लोगों के झुंड के साथ जाना होगा।

    भक्‍तों को टीटीडी उपलब्ध करवाएगा लकड़ी की छड़ी

    मंदिर में आने वाले हर श्रद्धालु को जंगली जानवर के हमले की स्थिति में बचाव के लिए एक लकड़ी की छड़ी भी दी जाएगी। टीटीडी के चेयरपर्सन बी करुणाकर रेड्डी ने ये जानकारी देते हुए बताया कि हम हर किसी को एक लकड़ी की छड़ी मुहैया कराएंगे, चाहे कितनी भी छड़ी की जरूरत हो।

    मंदिर ट्रस्‍ट ने भक्‍तों को दिया है ये आदेश

    इसके साथ ही टीटीडी ने सलाह दी है कि जंगली जानवरों को आकर्षित करने से बचने के लिए श्रद्धालुओं और मंदिर पर खाद्य सामग्रियों की दुकानों को सलाह दी गई है कि वे खाना न फैलाएं। इसके अलावा मंदिर आने वाले भक्तों को बंदरों को खाना नहीं खिलाने के लिए भी कहा गया है।

    बाड़ा लगाने का दिया प्रस्‍ताव दिया

    इसके साथ ही बच्‍ची के साथ हुई घटना के बाद अधिकारी ने बताया कि मंदिर मार्ग क्षेत्र में बाड़े लगाने का प्रस्ताव केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा गया है, क्योंकि मंदिर एक आरक्षित वन क्षेत्र में स्थित है।

    6 साल की बच्‍ची के साथ जानें क्‍या हुआ था?

    बता दें शुक्रवार की रात जब छह वर्षीय लक्षिता और उसका परिवार रात में मंदिर में पैदल रास्‍ते से जा रहे थे तभी एक तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया और उसे मार डाला। परिवार के अनुसार मना करने के बावजूद वो कुछ खरीदने के लिए चली गई और रास्ता भटक गई थी और बाद में उसका शव झाड़ियों में मिला। हालांकि बच्‍ची का हत्‍यारा तेंदुआ 48घंटे बाद ही पकड़ लिया गया था, वहीं वन अधिकारियों के अनुसार इस क्षेत्र में तेंदुए और स्लॉथ भालू सहित और भी जंगली जानवर हैं।

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