Parshuram Jayanti 2021: भगवान परशुराम के बारे में कुछ खास बातें

नई दिल्ली, 12 मई। भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म त्रेता युग में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हुआ था। इस बार यह तिथि 14 मई 2021 शुक्रवार को आ रही है। भगवान परशुराम की जन्म स्थली वर्तमान में मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के मानपुर ग्राम में जानापाव नामक पर्वत पर है। जानापाव पर्वत से चंबल समेत सप्तनदियों का उद्गम भी होता है। परशुराम ब्राह्मण वंश के जनक और सप्तऋषियों में से एक हैं। परशुराम के पिता महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका हैं। इन्हें भगवान विष्णु का आवेशावतार कहा जाता है। पौराणिक आख्यानों में वर्णन है किभगवान परशुराम का जन्म छह उच्च ग्रहों के संयोग में हुआ था जिस कारण वे परम तेजस्वी, ओजस्वी, पराक्रमी और शौर्यवान थे। वे माता-पिता के परम आज्ञाकारी पुत्र थे। उन्होंने पिता के कहने पर अपनी ही माता का सिर काट दिया था और पिता से वरदान स्वरूप माता को जीवित करवा लिया था।

Parshuram Jayanti 2021: परशुराम के बारे में कुछ खास बातें

भगवान परशुराम के बारे में खास बातें

  • परशुराम का नामकरण उनके पितामह अर्थात् दादाजी महर्षि भृगु ने किया था। सर्वप्रथम उन्होंने नाम राम रखा था किंतु बाद में शिवजी द्वारा परशु दिए जाने के कारण वे परशुराम कहलाए।
  • परशुराम को विष्णु का आवेशावतार कहा जाता है। अर्थात् वे विष्णु के सभी अवतारों में सबसे ज्यादा उग्र हैं।
  • परशुराम की आरंभिक शिक्षा महर्षि विश्वामित्र एवं ऋचिक के आश्रम में हुई थी। महर्षि ऋचिक से उन्हें शारंग नामक दिव्य वैष्णव धनुष और महर्षि कश्यप से वैष्णव मंत्र प्राप्त हुआ था।
  • इसके बाद वे भगवान शंकर से शिक्षा प्राप्त करने के लिए कैलाश पर्वत चले गए। वहां उन्होंने शंकरजी से अनेक दिव्य अस्त्र और शक्तियां प्राप्त की। शिवजी से उन्हें दिव्य धनुष भी प्राप्त हुआ था जिसे भगवान राम ने तोड़कर सीता स्वयंवर जीता था।
  • शंकरजी से उन्हें श्रीकृष्ण का त्रैलोक्य विजय कवच, स्तवराज स्तोत्र और मंत्र कल्पतरू समेत अनेक दिव्य और चमत्कारी मंत्र सिद्धियां प्राप्त हुई थी।
  • परशुराम सप्त ऋषियों और सप्त चिरंजीवी में शामिल हैं। वे आज भी पृथ्वी पर सशरीर मौजूद हैं।
  • परशुराम शस्त्रविद्या के महान गुरु थे। उन्होंने द्वापर युग में भीष्म, द्रोण, कर्ण को भी शस्त्र विद्या दी थी।
  • परशुराम स्ति्रयों को शक्तियां देने और नारी सशक्तीकरण के प्रबल पक्षधर थे। उन्होंने अत्रि की पत्नी अनुसुइया, अगस्त्य की पत्नी लोपामुद्रा और अपने प्रिय शिष्य अकृतवण के सहयोग से विराट नारी जागृति अभियान प्रारंभ किया था।
  • पुराणों के अनुसार कलयुग के अंत में होने वाले भगवान विष्णु के अंतिम अवतार कल्की अवतार के समय में कल्की के गुरु के रूप में प्रकट होंगे।
  • भगवान परशुराम ने अहंकारी हैहयवंशीय क्षत्रियों का 21 बार नाश किया था।
  • वे पृथ्वी पर वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार के वाहक थे।
  • भारत के अधिकांश ग्राम भगवान परशुराम द्वारा ही बसाए गए हैं। वर्तमान के कोंकण, गोवा और केरल परशुराम जी की ही देन है।
  • भगवान परशुराम पशु-पक्षियों से उन्हीं की भाषा में जीवंत संवाद स्थापित कर लेते थे। खूंखार से खूंखार हिंसक पशु भी उनके सामने आते ही उनसे मित्रवत व्यवहार करने लग जाता था।

जन्मोत्सव पर ब्राह्मण समाज करता है विशेष पूजा

अक्षय तृतीया पर संपूर्ण ब्राह्मण समाज अपने आराध्य देव भगवान परशुराम का विशेष पूजन करता है। इस दिन समाज द्वारा शोभायात्राएं निकाली जाती हैं और विशेष आयोजन होते हैं। हालांकिइस बार लाकडाउन के कारण बड़े आयोजन कहीं नहीं होंगे।

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