Navratri 2023: जानिए दुर्गासप्तशती पाठ करने के फायदे

Navratri 2023: दुर्गा सप्तशती को साक्षात भगवती मां दुर्गा का स्वरूप कहा गया है। इसमें समाहित मंत्रों-श्लोकों का एक-एक अक्षर, एक-एक मात्रा चैतन्य है और शीघ्र प्रभाव डालने वाली है। दुर्गा सप्तशती का पाठ वैसे तो पूरे साल कभी भी किया जा सकता है, लेकिन नवरात्रि के दिनों में इसके पाठ का महत्व सर्वाधिक है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के पाठ के बिना संपूर्ण दुर्गा पूजा अधूरी मानी जाती है।

Navratri 2021: जानिए दुर्गासप्तशती पाठ करने के फायदे

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    शास्त्रों के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ करने वाले साधक को स्नान आदि से पवित्र होकर, शुद्ध-स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद आसन शुद्धि की क्रिया संपन्न करके आसन पर बैठे साथ में शुद्ध जल, पूजन सामग्री, दुर्गा सप्तशती की पुस्तक रखें। पुस्तक को अपने सामने काष्ठ के पटिए पर आसन बिछाकर विराजमान कर दें। ललाट पर भस्म, चंदन, रोली या केसर का तिलक लगा लें। पूर्वाभिमुख होकर चार बार आचमन करें। इसके बाद प्राणायाम आदि करके गणेश सहित पंच देवताओं और गुरुजनों का पूजन करें। इसके बाद कुश की पवित्री धारण करके हाथ में लाल पुष्प, अक्षत, जल और सिक्का लेकर संकल्प करें। पंचोपचार पुस्तक का पूजन करें। इसके बाद योनिमुद्रा बनाकर भगवती को प्रणाम करें। मूल नवार्णमंत्र से पुस्तक को स्थापित करें। इसके बाद शापोद्धार किया जाता है। इसके अनंतर उत्कीलन मंत्र का जाप किया जाता है। इसका जप आदि और अंत में 21-21 बार होता है। इसके बाद आदि और अंत में सात-सात बार मृतसंजीवनी विद्या का जप करना चाहिए। इसके बाद कवच, अर्गलास्तोत्र, कीलक करने के बाद सप्तशती का पाठ किया जाता है।

    विधि-विधान से पाठ करना चाहिए

    नवरात्रि में संपूर्ण विधि-विधान से पाठ करना चाहिए, जिसकी विधि अत्यंत लंबी है जिसे किसी पुस्तक के माध्यम से ही किया जा सकता है। अत्यंत विस्तार के कारण यहां केवल संक्षिप्त विधि बताई गई है। यदि एक दिन में पूर्ण शास्त्रोक्त विधि से दुर्गासप्तशती का पाठ नहीं कर सकते तो इसे क्रमानुसार भी किया जा सकता है। वहीं ज्यादा सरल और सुविधाजनक भी रहता है। यदि एक दिन में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना हो तो प्रोक्षण अर्थात् स्वयं के ऊपर जल का छिड़काव करना अर्थात् शुद्धिकरण, इसके बाद आचमन, संकल्प, उत्कीलन, शापोद्धार, कवच, अर्गलास्तोत्र, कीलक, सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ, मूर्ति रहस्य, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र और क्षमा प्रार्थना।

    13वें अध्याय तक उत्तम चरित्र

    समयाभाव से विशेष विधि से भी पाठ संपन्न किया जा सकता है। इसमें संपूर्ण पुस्तक को तीन भागों प्रथम चरित्र, मध्यम चरित्र और उत्तम चरित्र में बांटा गया है। दुर्गासप्तशती के पहले अध्याय को प्रथम चरित्र, 2, 3, 4 अध्याय को मध्यम चरित्र और 5 से 13वें अध्याय तक उत्तम चरित्र कहा जाता है।

    इस विधि से नवरात्रि में इस प्रकार पाठ करें

    • पहले दिन- प्रथम अध्याय
    • दूसरे दिन- दूसरा और तीसरा अध्याय
    • तीसरे दिन- चौथा अध्याय
    • चौथे दिन- 5, 6, 7 व आठवां अध्याय
    • पांचवें दिन- 9 व 10वां अध्याय
    • छठा दिन- 11वां अध्याय
    • सातवां दिन- 12 व 13वां अध्याय
    • आठवां दिन- मूर्ति रहस्य, हवन, क्षमता प्रार्थना।
    • नवां दिन- कन्याभोज, दान-दक्षिणा आदि।

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