Navratri 2021: महाअष्टमी आज, जानिए कब करें कन्या पूजन, क्या है नियम?
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। आज है महाअष्टमी, आज मंदिरों में सुबह से ही मां के जयकारे गूंज रहे हैं। अष्टमी का आरम्भ कल रात 9 बजकर 49 मिनट से हो चुका है, जो कि आज रात 8 बजकर 9 मिनट पर तक रहेगी और इसके बाद नवमी लग जाएगी। आज लोगों के घरों में मां गौरी की विशेष पूजा-अर्चना चल रही है। आज बहुत सारे घरों में कन्या पूजन भी किया जा रहा है। माना जाता है कि कुमारी कन्याओं में मां दुर्गा का वास होता है, इसलिए लोगों के घरों में नवरात्रि के दिनों में कन्याओं को भोजन खिलाया जाता है।
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कुछ लोग सप्तमी को कन्या पूजन करते हैं लेकिन आम तौर पर कन्यापूजन अष्टमी और नवमी को ही होता है। जिनके घरों में घट स्थापाना होती है, उनके लिए नियम है कि वो हवन-पूजन से पहले ही कन्याओं को भोजन खिला दें क्योंकि हवन के बाद मां की विदाई हो जाती है इसलिए कन्या पूजन को हवन से पहले ही किया जाता है।
हलुआ-पूड़ी और चना
कन्यापूजन में आम तौर पर हलुआ-पूड़ी और चना बनाने का रिवाज है तो कहीं-कहीं कन्या-पूजन में खीर-पूड़ी खिलाई जाती है। कुछ लोग दही-जलेबी भी खिलाते हैं को कहीं-कहीं पूरा भोजन( दाल-चावल-रोटी और सब्जी ) कन्याओं को खिलाया जाता है। आज अष्टमी रात तक है तो कन्यापूजन रात 8 बजकर 9 मिनट से पहले कभी भी किया जा सकता है।
उपहार में कुछ गिफ्ट दिए जाते हैं
कन्याओं का पूजन करने से पहले सभी का पैर का धोया जाता है और फिर उन्हें टीका लगाया जाता है और उसके बाद उन्हें थाली परोसी जाती है और बाद में उन्हें उपहार में कुछ गिफ्ट दिए जाते हैं। कन्याओं के रूप में लोग अपने घरों में मां दुर्गा का एक तरह से स्वागत करते हैं और उन सभी का पैर छूकर आशीर्वाद मांगते हैं। कन्याओं को भोजन कराते समय साथ में एक बालक का भी होना अनिवार्य माना जा ता है क्योंकि बालक को बटुक भैरव का प्रतीक मानते हैं। माना जाता है कि नवरात्रि की पूजा तब तक सफल नहीं मानी जाती है, जब तक कि कन्याओं का पूजन नहीं होता है इसी वजह से कन्या पूजन नवरात्रि का अभिन्न अंग है।












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