मजहब के नाम पर लड़ने वालों जरा गौर कीजिए 'ऊं' और '786' पर
'ऊं' का मतलब शून्य होता है, तो मुसलमानों के यहां मूर्ति की पूजा नहीं होती है, मतलब दोनों ही चीजें एक ही हैं बस उसे मानने वाले अलग-अलग हो गये हैं।
नई दिल्ली। मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना लेकिन यह तो हम लोग ही है जो धर्म औऱ मजहब के नाम पर आपस में लड़ते रहते हैं। लेकिन जिसने गीता पढ़ी है और जिसे कुरान के बारे में भी मालूम है उसे Diwali में भी 'अली' और Ramzan में भी 'राम' नजर आता है।
आज हम आपको बताते हैं कि हिंदू के लिए सबसे पवित्र शब्द 'ऊं' और मुस्लिमों के लिए सबसे पाक नंबर '786' में क्या अटूट और अनोखा संबंध है, अगर आप भी इस पर गौर फरमायेंगे तो आज के बाद आपके लिए अल्लाह, भगवान सब बराबर हो जायेंगे।
पहले जानते हैं हिंदूओं के पावन शब्द 'ऊं' का महत्व
'ऊं' शब्द हिंदूओं के सबसे पावन शब्दों में से एक है। कहते हैं कि इसको एक बार मन से कहने मात्र से ही सारे दुखों का विनाश हो जाता है, मन पवित्र और शांत हो जाता है, इसलिए किसी भी पूजा से पहले 'ऊं' शब्द का उच्चाऱण किया जाता है जिससे कि पूजा करने वाले जातक की पूजा स्वीकार हो जाये।

अब जानते हैं मुस्लिमों के पाक नंबर '786' का महत्व
786 अंक को हर सच्चा मुसलमान ऊपर वाले का वरदान मानता है। इसलिए धर्म को मानने वाले लोग अपने हर कार्य में 786 अंक के शामिल होने को शुभ मानते हैं। कहते हैं कि अगर आप अरबी या उर्दू में 'बिस्मिल्ला अल रहमान अल रहीम' को लिखेंगे तो उसका योग 786 आता है इसलिए यह काफी पाक नंबर है।

श्रीकृष्ण की बांसुरी
भगवान कृष्ण को बासुंरी वाला कहा जाता है क्योंकि वो बांसुरी बजाते थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण सात छिद्रों से सात स्वरों के साथ हाथों की तीन-तीन अंगुलियों से यानी छ: अंगुलियों से बांसुरी बजाकर लोगों को अपना मुरीद बनाते थे और भगवान देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान थे इसलिए हुआ ना यहां पर 786 नंबर। इसलि्ए हिंदु लोगों के लिए भी यह नंबर काफी पावन है।

पुस्तक 'द जीविस माइंड'
प्रसिद्ध शोधकर्ता राफेल पताई ने अपनी पुस्तक 'द जीविस माइंड' में लिखा है कि अगर आप 786 नंबर की आकृति पर गौर करेंगे तो यह बिल्कुल संस्कृत में लिखा हुआ 'ऊं' दिखायी देगा। जिसको परखने के लिए आप 786 को हिंदी की गिनती में यानी कि ७८६ लिखिये, उत्तर खुद ब खुद मिल जायेगा।

दोनों का मतलब एक ही है
'ऊं' शब्द का वैज्ञानिक कारण भी है, कहते हैं इसे लंबी सांस खींचकर सुबह-सुबह बोलने से इंसान के अंदर स्वस्थ हवा का संचार होता है और वो हेल्दी रहता है तो वहीं अगर 786 भी खड़े होकर बोलिए तो समान चीजें आपके अंदर होती है तो हुई ना दोनों में खास समानता।

मतलब दोनों ही चीजें एक ही हैं ..
'ऊं' का मतलब शून्य होता है, तो मुसलमानों के यहां मूर्ति की पूजा नहीं होती है लेकिन वो '786' के पैगम्बर साहब के मानक के रूप में प्रयोग करते हैं, मतलब दोनों ही चीजें एक ही हैं बस उसे मानने वाले अलग-अलग हो गये हैं।
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