Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं दही-चूड़ा? क्या है इसके पीछे का राज?
Makar Sankranti 2026: 14 फरवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा, साल का पहला त्योहार होने की वजह से इसका इंतजार बच्चों से लेकर बूढ़ों तक को होता है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में इस दिन दही-चूड़ा खाने का रिवाज है।
आम तौर पर लोग सर्दियों में दही खाने से बचते हैं लेकिन इस दिन दही खोज-खोजकर खाते हैं लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा खाने की परंपरा क्यों है? तो आपको बता दें कि इसके पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं लेकिन पहले ये जानते हैं कि दही-चूड़ा क्या है?

Makar Sankranti 2026: दही-चूड़ा मुख्य रूप से दो चीजों से बनता है
- चूड़ा (पोहा): धान से बना हल्का और सुपाच्य आहार
- दही: दूध से बना ठंडा पदार्थ, पौष्टिक और पाचन में सहायक
- इसे गुड़, चीनी, तिल, मूंगफली, केला या मुरमुरे के साथ खाया जाता है।
Makar Sankranti 2026: दही-चूड़ा की धार्मिक मान्यता
मकर संक्रांति को दान और पुण्य का पर्व माना जाता है। इस दिन सादा, सात्विक और शुद्ध भोजन ग्रहण करने की परंपरा है। दही-चूड़ा को सात्विक आहार माना जाता है इसलिए इसे देवताओं को अर्पित कर प्रसाद के रूप में भी खाया जाता है। एक कहावत है कि 'मकर में खइले दही-चूड़ा, त साल भर रहे फुर्ती और ताजगी'। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाने से साल भर स्वास्थ्य अच्छा रहता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
Makar Sankranti 2026: स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है दही-चूड़ा
चूड़ा कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। ठंड के मौसम में यह शरीर को सक्रिय बनाए रखता है तो वहीं दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं और ठंड में होने वाली गैस, कब्ज जैसी समस्याओं से राहत देते हैं। सूर्य के उत्तरायण होने से शरीर में ताप परिवर्तन शुरू होता है। दही-चूड़ा शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी मदद करता है।
Makar Sankranti 2026: कृषि और लोक परंपरा से जुड़ाव
मकर संक्रांति नई फसल का भी उत्सव है। धान की कटाई के बाद चूड़ा आसानी से उपलब्ध होता है। किसान अपनी मेहनत की पहली उपज को दही के साथ मिलाकर खाते हैं और भगवान को धन्यवाद देते हैं। यही कारण है कि दही-चूड़ा इस पर्व का प्रतीक बन गया।
Makar Sankranti 2026: दही-चूड़े का सामाजिक महत्व
इस दिन घरों में रिश्तेदारों और पड़ोसियों को दही-चूड़ा खिलाने की परंपरा है। इससे आपसी प्रेम, भाईचारा और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं। गांवों में सामूहिक रूप से दही-चूड़ा भोज का आयोजन भी किया जाता है।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।
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