Makar Sankranti 2023 Date: जानिए 14 या 15 जनवरी कब है मकर संक्रांति?

Makar Sankranti 2023 date: मकर संक्रांति के दिन सूर्य, शनि और शुक्र का एक ही राशि में मकर में रहना शश और मालव्य योग का निर्माण कर रहा है।

Makar Sankranti 2023 Date:

Makar Sankranti 2023 Date: संवत 2079 माघ कृष्ण अष्टमी रविवार के दिन चित्रा नक्षत्र और सुकर्मा योग में 15 जनवरी 2023 को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। चूंकिसूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को रात्रि में 8 बजकर 44 मिनट पर होगा इसलिए शास्त्रीय दृष्टि से संक्रांति का पुण्य काल अगले दिन 15 जनवरी को रहेगा। इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य आदि कर्म किए जा सकेंगे।

मलमास होगा समाप्त, उत्तरायण होगा प्रारंभ

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही धनुर्मास अथवा मलमास समाप्त होगा। इसके साथ ही सूर्य का उत्तरायण प्रारंभ होगा। उत्तरायण से देवताओं का दिन प्रारंभ होता है। इस दिन से विवाह आदि मांगलिक कार्य फिर से प्रारंभ हो जाएंगे। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य आदि का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति पुण्य काल के दौरान चावल-मूंग दाल की खिचड़ी, काली तिल, गुड़, स्वर्ण का दाना, ऊनी वस्त्र, ऊनी कंबल, तांबे का कलश आदि दान करने करना चाहिए। गरीबों, जरूरतमंदों को उनके दैनिक उपयोग का सामान दान दें। पशुओं को हरा चारा, पक्षियों के लिए दाना-पानी आदि का इंतजाम करना चाहिए। इस दिन प्यासों के लिए प्याऊ लगवाने से बड़ा पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन दान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और वे शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हैं। ग्रह जनित पीड़ाएं भी दूर होती हैं। इस दिन रविवार होने से सूर्यदेव की विशेष कृपा प्राप्त होगी।

समृद्धि, प्रतिष्ठा, सम्मान प्राप्ति का दिन

इस बार मकर संक्रांति के दिन रविवार का संयोग भी बना है। रविवार सूर्य के पूजन का ही दिन है। इस दिन सूर्य के साथ शिवलिंग का संयुक्त पूजन करने से सुख-समृद्धि के साथ प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त होता है। इस दिन मस्तक पर केसर अथवा लाल चंदन का तिलक करने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है और कुंडली के अन्य दूषित ग्रहों की शांति होती है।

सूर्य, शनि, शुक्र की युति से बनेंगे विशिष्ट योग

मकर संक्रांति के दिन सूर्य, शनि और शुक्र का एक ही राशि में मकर में रहना शश और मालव्य योग का निर्माण कर रहा है। इस युति में शुभ कार्य, दान-पुण्य, निशक्तों की सेवा, असहायों की सहायता करना, तीर्थाटन, भागवत महापुराण का श्रवण आदि करने से भाग्य मजबूत होता है। जीवन के सारे संकटों का समाधान मिलता है। सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

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