कृष्ण जन्माष्टमी: श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव

नई दिल्ली| भगवान विष्णु के दस अवतारों में दो अवतार ऐसे हैं जिनका भारतीय जीवन पर गहरा असर है। ये दो अवतार श्रीरामावतार और श्रीकृष्णावतार हैं। कलाओं की दृष्टि से भगवान श्रीकृष्ण को पूर्णावतार माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण कई मायनों भारतीय जीवन को दिशा देते हैं। असल में विष्णु का यह अवतार अपने समय के समाज से लेकर आज के आधुनिक समाज तक का दिशा-निर्देशन करता है। श्रीकृष्ण का विराट व्यक्तित्व और उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं।

भारतीय चिंतन परंपरा की अमूल्य धरोहर और ज्ञान, भक्ति और कर्म की त्रिवेणी 'भगवत् गीता' श्रीकृष्ण के उपदेश का संकलन माना जाता है। कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र में स्वजनों से युद्ध करने में अर्जुन की किंतर्व्य विमूढ़ता और अनाशक्ति को दूर करने के लिए भगवान ने जो कुछ कहा था वही गीता में पद्य के रूप में संकलित किया गया है।

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र मास (भादो महीना) की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। पुरा आख्यानकों और जनश्रुतियों के मुताबिक उस समय मथुरा के राजा कंस के अत्याचार से लोक जगत त्राहि-त्राहि कर रहा था। कंस का संहार करने के लिए ही भगवान विष्णु देवकी और वसुदेव के आठवें पुत्र के रूप में उत्पन्न हुए थे।

आईये जानते हैं कृष्ण जन्माष्टमी की कथा

जब डर गया अत्याचारी कंस...

जब डर गया अत्याचारी कंस...

कथा के अनुसार, देवकी कंस की बहन थी। उनका विवाह बड़ी धूमधाम से वसुदेव के साथ हुआ था। विदा वेला में आकाशवाणी से कंस को ज्ञात हुआ कि जिस बहन के प्रति वह इतना प्रेम दिखा रहा है उसी के गर्भ से उत्पन्न होने वाला आठवां पुत्र उसका वध करेगा। इसके बाद कंस ने अपनी बहन और बहनोई को कैद कर लिया और उनकी हर संतान का वध करने लगा।

वासुदेव ने कृष्ण को मां यशोदा के पास छोड़ा

वासुदेव ने कृष्ण को मां यशोदा के पास छोड़ा

आठवीं संतान के रूप में जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तब माया के प्रभाव से सभी प्रहरी निद्रा के आगोश में समा गए और वसुदेव बालक श्रीकृष्ण को लेकर गोकुल में अपने मित्र नंद के यहां छिपा आए। नंद की पत्नी यशोदा ने एक मृत बच्ची को जन्म दिया था जिसे वे अपने साथ लेते आए और उसे कंस को अगले दिन सौंप दिया।

कृष्ण ने किया कंस का वध

कृष्ण ने किया कंस का वध

किंवदंती है कि सौंपे जाने से पूर्व बच्ची जीवित हो उठी थी और जैसे ही कंस ने उसे पत्थर पर पटकना चाहा, वह उसके हाथों से छूट गई और उसने अट्टहास करते हुए कहा, "तुम्हारा वध करने वाला तो गोकुल में खेल रहा है।" यहीं से कंस और कृष्ण के बीच द्वंद्व की शुरुआत होती है जो कंस के वध तक जारी रहती है।

आस्था का पर्व 'कृष्ण जन्माष्टमी'

आस्था का पर्व 'कृष्ण जन्माष्टमी'

कृष्ण जन्मोत्सव का दिन भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। कृष्ण जन्मभूमि मथुरा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। देशभर में पूरे दिन व्रत रखकर नर-नारी तथा बच्चे रात्रि 12 बजे मंदिरों में अभिषेक होने पर पंचामृत ग्रहण कर व्रत खोलते हैं।

पूरे भारत में जन्माष्टमी की धूम

पूरे भारत में जन्माष्टमी की धूम

कृष्ण के जन्म स्थान मथुरा के अलावा गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर सहित देश के सभी कृष्ण मंदिरों में भव्य समारोह का आयोजन होता है। विशेष रूप से यह महोत्सव वृंदावन, मथुरा (उत्तर प्रदेश), द्वारका (गुजरात), गुरुवयूर (केरल), उडूपी (कर्नाटक) तथा देश-विदेश में स्थित इस्कॉन के मंदिरों में आयोजित होते हैं।

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