Karwa Chauth 2020: करवा चौथ की पूजा में आवश्यक है यह सामग्री
नई दिल्ली। करवा चौथ की पूजा सौभाग्य कामना से जुड़ी है। संसार की हर सुहागन जीवन में केवल एक ही कामना रखती है कि उसकी मांग का सिंदूर, बिंदी की चमक, चूड़ियों की खनक और पायल की छमक जीवन की आखिरी सांस तक बनी रहे। यही वजह है कि जब बात सबसे बड़े सौभाग्य पर्व पर पूजा की आती है, तब कोई भी महिला तैयारी में कसर नहीं छोड़ना चाहती।
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आपकी इस तैयारी को पूरा करने के लिए आज हम आपको बता रहे हैं वे वस्तुएं, जिनके बिना करवा चौथ की पूजा अधूरी मानी जाती है-
- थाली : सबसे पहले पूजन सामग्री रखने के लिए एक बड़ी थाली की आवश्यकता होती है। इस थाली के बीच में स्वस्तिक बनाकर गणपति जी की स्थापना करनी होती है। इसके अलावा पूजा का सामान भी अधिक होता है। इसीलिए पूजा की थाली आकार में बड़ी और वजन में हल्की होना चाहिए।
- करवा माता का चित्र : करवा चौथ की पूजा के समय माता का चित्र या पन्ना हर पूजन सामग्री वाली दुकान पर मिल जाता है।
- करवा : पूजा के नाम के अनुसार करवा इस पूजा का सबसे आवश्यक हिस्सा होता है। करवा एक तरह का मिट्टी का लोटा होता है, जिसमें टोंटी लगी रहती है। बाजार में बहुत ही सुंदर करवे आसानी से उपलब्ध हैं।
- कलश : पूजा की थाली में कलश का महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसी कलश के जल से चन्द्रमा की पूजा कर अर्घ्य दिया जाता है।
- आचमनी : आचमनी से तीन बार जल अर्पित कर ईष्ट को भोग भेंट किया जाता है। भोग या प्रसाद चढ़ाने के बाद वापस तीन बार जल अर्पित कर ईष्ट का हस्त प्रक्षालन कराया जाता है। यह आचमनी दिन में करवा माता की पूजा और रात में चन्द्रमा को भोग लगाने में काम आती है।
- दीपक : भारतीय घरों की हर पूजा दीपक प्रज्ज्वलित करने के साथ ही आरम्भ होती है। यह दीपक हर पूजा की तरह करवा चौथ की थाली में भी परम आवश्यक है।
- छलनी : यह करवा चौथ की पूजा का सबसे अनूठा और विशिष्ट अंग है। इस छलनी से ही चांद को देखने के बाद सुहागिनें अपने पति के दर्शन करती हैं और उनके चिर स्वस्थ, दीर्घायु होने की प्रार्थना करती हैं।
- सींक : करवा चौथ की पूजा में यह एक ऐसी सामग्री है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। सींक वास्तव में करवा माता का अस्त्र मानी जाती है। इस सींक के द्वारा करवा माता यमराज के सहायक चित्रगुप्त की उस किताब के पन्ने फाड़ देती हैं, जिनमें जन्म - मरण का हिसाब रहता है।
- हल्दी : हल्दी हर सुहागन के श्रृंगार का पहला आधार मानी जाती है। हल्दी सौभाग्य सूचक होती है। इसके बिना कोई भी पूजा थाली अधूरी मानी जाती है।
- कुमकुम : कुमकुम या सिंदूर के बिना कोई भी सौभाग्य पर्व मनाया नहीं जा सकता। विशेष रूप से माता पूजन में कुमकुम अनिवार्य होता है। करवा चौथ तो वैसे भी सुहाग पर्व है, जिसमें कुमकुम का स्थान विशिष्ट होता है।
- चावल : चावल को हमारे ग्रंथों में अक्षत कहा गया है अर्थात जो कभी नष्ट नहीं होता। अक्षत को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। अखंड सौभाग्य की कामना के साथ देवी- देवताओं को चावल अर्पित करने से अक्षत भविष्य का आशीर्वाद मिलता है।
- इनके अलावा मिठाई, फल, फूल, माला, धूपबती, कपूर आदि ऐसी वस्तुएं हैं, जो हर पूजा का हिस्सा होती हैं। हर कोई अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार पूजा सामग्री को घटा या बढ़ सकता है।












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