Hariyali Teej 2021: जानिए 'हरियाली तीज' का शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि
नई दिल्ली, 11 अगस्त। पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला व्रत 'हरियाली तीज' आज है। सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को 'हरियाली तीज' का पर्व मनाया जाता है। सावन पर्व में चारों और हरियाली ही हरियाली रहती है इसलिए इसका नाम 'हरियाली तीज' है। इस व्रत को करने से महिला का सुहाग हमेशा अमर रहता है और उसके घर में सुख की कभी कोई कमी नहीं होती है। इसे सावन की तीज या कजली तीज भी कहते हैं। ये मूल रूप से राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार और हरियाणा में मनाई जाती है। राजस्थान, मध्यप्रदेश में इसे सिंजारा तीज के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस दिन नवविवाहित महिलाओं के लिए मायके से सिंजारा भेजा जाता है।

हरियाली तीज का शुभ मुहूर्त
- 10 अगस्त 2021 को शाम 6 बजकर 3 मिनट से शुरू होकर 11 अगस्त 2021 को शाम 5 बजकर 1 मिनट पर समाप्त होगी।
- पहला मुहूर्त सुबह 4 बजकर 24 मिनट से 5 बजकर 17 मिनट तक
- दूसरा मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 7 मिनट तक रहेगा।
- वैसे तीज का पर्व तो पूरे दिन ही रहेगा इसलिए अगर आप विशेष समय में व्रत नहीं कर पाए तो 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 42 मिनट के बाद से रात तक में कभी भी पूजा कर सकती हैं।

पूजाविधि
- इस दिन सुबह से महिलाएं बिना पानी के निर्जला रखती हैं और शाम को शिव-पार्वती की पूजा करने और चांद को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं।
- इसमें सत्तू की गोलियां बनाई जाती हैं, जिसे खाकर ही व्रत खोला जाता है।
- कुछ कुंवारी कन्याएं भी मनचाहे पति की प्राप्ति के लिए ये व्रत रखती हैं।
- इस दिन महिलाएं सुबह उठकर स्नान करें और 16 श्रृंगार करके बालू रेत से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर विधिवत पूजन करें।
- मां पार्वती को सुहाग की सारी सामग्री अर्पित करें।
- भगवान शिव को बेल, धतूरा आदि से पूजन कर मिष्ठान्न् का भोग लगाएं।
- इसके बाद हरियाली तीज की कथा सुनें।
- महिलाएं यह व्रत सुहाग की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से करती हैं।
- इसके बाद चांद को अर्घ्य देकर पति के हाथों से सत्तू खाकर और पानी पीकर अपना व्रत खोलें।

शिव-पार्वती को प्रसन्न करने के मंत्र
- 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः'
- ''ऊँ पार्वत्यै नमः
- 'ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नमः''
- 'ऊँ गौरये नमः
- मुनि अनुशासन गनपति हि पूजेहु शंभु भवानि।
- कोउ सुनि संशय करै जनि सुर अनादि जिय जानि'।
- ऊँ ह्लीं वाग्वादिनी भगवती मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु फट् स्वाहा।












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