Happy Janmashtami 2023: मथुरा और वृंदावन में जन्मोत्सव क्यों होता है खास?
Happy Janmashtami 2023: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी मनाई जाती है, कहते हैं श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, यूं तो श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे भारत में काफी धूम-धाम से मनाया जाता है लेकिन मथुरा और गोकुल में एक अलग तरह का जोश और उमंग देखने को मिलता है।

दरअसल इसके पीछे वजह ये है कि मथुरा भगवान कृष्ण की जन्स्थली है और वृंदावन वो स्थान है, जहां नंदोगोपाल ने अपना बचपन से लेकर किशोरावस्था का वक्त बिताया था इसलिए इन दोनों जगहों में कान्हा का जन्म एक उत्सव की तरह मनाया जाता है, जिसकी तैयारी यहां के लोग साल भर करते हैं।
कान्हा का जन्मोत्सव पूरे दस दिन मनाया जाता है
यहां पर कान्हा का जन्मोत्सव पूरे दस दिन मनाया जाता है, इन दस दिनों में कृष्ण लीलाएं आयोजित की जाती है, रास रचाएं जाते हैं तो वहीं मंदिरों या धार्मिक स्थलों में झांकियां सजाई जाती हैं इसलिए इन दोनों जगहों की खूबसूरती का दीदार अगर आपको करना है तो जन्माष्टमी के पर्व पर जरूर यहां आना चाहिए।
दूध, दही, शहद, घी और पानी से स्नान
वृंदावन में कान्हा जी के करीब 400 से ज्यादा मंदिर हैं, यहां पर जन्माष्ठमी के मौके पर आधी रात तक मंदिरों में जश्न मनता है। यहां पर भगवान को दूध, दही, शहद, घी और पानी से स्नान कराया जाता है और मिष्ठानों का भोग लगाया जाता है।
जन्माष्टमी के मौके पर भगवान को छप्पन भोग लगते हैं
तो वहीं इन दोनों शहरों में जन्माष्टमी के मौके पर भगवान को छप्पन भोग लगते हैं। जो कि भक्तों को भी बांटे जाते हैं, कान्हा के जन्मदिन पर बनने वाला ये विशेष प्रसाद यहां की पूजा के मुख्य आकर्षणों में से एक है।
दोनों शहरों को बांके बिहारी की नगरी कहते हैं
मथुरा और वृंदावन में भी दही हांडी के आयोजन देखे जाते हैं। कुल मिलाकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन पूरे उत्साह, प्रेम और श्रद्दा के साथ इन दोनों स्थानों में मनाया जाता है, इसी वजह से लोग मथुरा-वृंदावन को बांके बिहारी की नगरी के नाम से भी संबोधित करते हैं।












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