Guru Purnima 2024 Kundali Dosh: आज हैं 6 शुभ योग, कुंडली दोष को दूर करने के लिए जरूर करें इस चालीसा का पाठ
Guru Purnima 2024 (श्री बृहस्पतिदेव चालीसा) : आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है, जिसे कि गुरु पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। आज पूरा देश इस दिन को हर्ष और उल्लास से मना रहा है।
आज का दिन काफी शुभ है क्योंकि आज एक, दो नहीं बल्कि 6 शुभ योग बन रहे हैं, जो कि हर राशि के लिए काफी अच्छा है। आपको बता दें कि आज सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, शुक्रादित्य योग, शश योग, कुबेर योग और षडाष्टक योग बन रहा है।

जो लोग भी इस शुभ योग में गुरु की पूजा करेंगे उन्हें यश और लाभ मिलेगा तो वहीं अगर आपकी कुंडली में कोई दोष है या फिर गुरु खराब है तो आज के दिन आपको वृहस्पति चालीसा का पाठ करना चाहिए।
क्योंकि ऐसा करने से दोष तो दूर होता ही है साथ ही आपको तरक्की भी प्राप्त होगी और आप हर क्षेत्र में सफल साबित होंगे और वृहस्पति देव की कृपा से सिद्धि-बुद्धि, ज्ञान-विवेक की प्राप्ति होती है।
यहां पढ़ें श्री बृहस्पतिदेव चालीसा (Lord Brihaspati Chalisa )
||दोहा||
- प्रन्वाऊ प्रथम गुरु चरण, बुद्धि ज्ञान गुन खान
- श्रीगणेश शारदसहित, बसों ह्रदय में आन
- अज्ञानी मति मंद मैं, हैं गुरुस्वामी सुजान
- दोषों से मैं भरा हुआ हूं तुम हो कृपा निधान।
||चौपाई||
- जय नारायण जय निखिलेशवर, विश्व प्रसिद्ध अखिल तंत्रेश्वर
- यंत्र-मंत्र विज्ञानं के ज्ञाता , भारत भू के प्रेम प्रेनता
- जब जब हुई धरम की हानि, सिद्धाश्रम ने पठए ज्ञानी
- सच्चिदानंद गुरु के प्यारे,सिद्धाश्रम से आप पधारे
- उच्चकोटि के ऋषि-मुनि स्वेच्छा, ओय करन धरम की रक्षा
- अबकी बार आपकी बारी ,त्राहि त्राहि है धरा पुकारी
- मरुन्धर प्रान्त खरंटिया ग्रामा, मुल्तानचंद पिता कर नामा
- शेषशायी सपने में आये, माता को दर्शन दिखलाये
- रुपादेवि मातु अति धार्मिक, जनम भयो शुभ इक्कीस तारीख
- जन्म दिवस तिथि शुभ साधक की, पूजा करते आराधक की
- जन्म वृतन्त सुनाये नवीना, मंत्र नारायण नाम करि दीना
- नाम नारायण भव भय हारी, सिद्ध योगी मानव तन धारी
- ऋषिवर ब्रह्म तत्व से ऊर्जित, आत्म स्वरुप गुरु गोरवान्वित
- एक बार संग सखा भवन में, करि स्नान लगे चिन्तन में
- चिन्तन करत समाधि लागी, सुध-बुध हीन भये अनुरागी
- पूर्ण करि संसार की रीती, शंकर जैसे बने गृहस्थी
- अदभुत संगम प्रभु माया का, अवलोकन है विधि छाया का
- युग-युग से भव बंधन रीती, जंहा नारायण वाही भगवती
- सांसारिक मन हुए अति ग्लानी, तब हिमगिरी गमन की ठानी
- अठारह वर्ष हिमालय घूमे, सर्व सिद्धिया गुरु पग चूमें
- त्याग अटल सिद्धाश्रम आसन, करम भूमि आये नारायण
- धरा गगन ब्रह्मण में गूंजी, जय गुरुदेव साधना पूंजी
- सर्व धर्महित शिविर पुरोधा, कर्मक्षेत्र के अतुलित योधा
- ह्रदय विशाल शास्त्र भण्डारा, भारत का भौतिक उजियारा
- एक सौ छप्पन ग्रन्थ रचयिता, सीधी साधक विश्व विजेता
- प्रिय लेखक प्रिय गूढ़ प्रवक्ता, भुत-भविष्य के आप विधाता
- आयुर्वेद ज्योतिष के सागर, षोडश कला युक्त परमेश्वर
- रतन पारखी विघन हरंता, सन्यासी अनन्यतम संता
- अदभुत चमत्कार दिखलाया, पारद का शिवलिंग बनाया
- वेद पुराण शास्त्र सब गाते, पारेश्वर दुर्लभ कहलाते
- पूजा कर नित ध्यान लगावे, वो नर सिद्धाश्रम में जावे
- चारो वेद कंठ में धारे, पूजनीय जन-जन के प्यारे
- चिन्तन करत मंत्र जब गायें,विश्वामित्र वशिष्ठ बुलायें
- मंत्र नमो नारायण सांचा, ध्यानत भागत भुत-पिशाचा
- प्रातः कल करहि निखिलायन, मन प्रसन्न नित तेजस्वी तन
- निर्मल मन से जो भी ध्यावे, रिद्धि सिद्धि सुख-सम्पति पावे
- पथ करही नित जो चालीसा, शांति प्रदान करहि योगिसा
- अष्टोत्तर शत पाठ करत जो, सर्व सिद्धिया पावत जन सो
- श्री गुरु चरण की धारा. सिद्धाश्रम साधक परिवारा
- जय-जय-जय आनंद के स्वामी, बारम्बार नमामी नमामी
Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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