Chand and Ubh Chhath 2025: चांद छठ या ऊब छठ क्यों की जाती है? क्या है कथा?
Chand and Ubh Chhath 2025: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को 'बलराम जयंती' , 'ललई छठ', 'हलष्ठी', 'चांद छठ' या 'ऊब छठ' बनाई जाती है। ऊब का अर्थ लोकभाषा में खड़े रहना है। इस दिन स्त्रियां सुहाग की रक्षा और कुंवारी कन्याएं उत्तम वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती है और सूर्यास्त के बाद से चंद्रोदय होने तक खड़ी रहती है।
यह व्रत आज किया जा रहा । इस दिन उबले हुए अन्न का सेवन किया जाता है। इस दिन चंद्रोदय का समय उज्जैन के अनुसार रात्रि में 10 बजकर 19 मिनट रहेगा।

कैसे किया जाता है व्रत (Chand and Ubh Chhath 2025)
ऊब छठ के दिन प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। चांद छठ की कथा सुनती हैं। व्रती महिलाएं दिनभर निराहार रहकर शिव भक्ति में लीन रहती हैं। सायंकाल सूर्यास्त होने के बाद से लेकर चंद्रोदय होने तक बैठती नहीं है, खड़े रहती है। चंद्रोदय होने पर चंद्र को अर्घ्य देकर पूजा करती हैं और उबले हुए अनाज का भोजन करती है। इसके बाद व्रत पूरा होता है और फिर बैठक सकती हैं।
ऊब छठ के लाभ
- यह व्रत मुख्यत: उत्तर भारतीय राज्यों का है। इस व्रत को करने से चंद्र दोष शांत होते हैं।
- चंद्र मजबूत होता है और जिसके फलस्वरूप पारिवारिक स्थिति उत्तम होती है।
- मानसिक रोग दूर होते हैं। मानसिक शांति मिलती है।
- ऊब छठ का व्रत करने से परिवार में सामंजस्य बना रहता है। दंपतियों में एक-दूसरे के प्रति प्रेम बढ़ता है।
- ऊब छठ का व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना से करती है।
- ऊब छठ करने से कुंआरी कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है।
- इस व्रत के प्रभाव से घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
ऊब छठ की कथा (Chand and Ubh Chhath 2025)
एक बार चंद्रमा पर कलंक लग गया, जिससे उनका तेज कम हो गया और धरती पर रोग-व्याधि फैलने लगे। तब देवताओं ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण षष्ठी के दिन स्नान कर शिवजी की पूजा करने का निर्देश दिया। चंद्रमा ने उस दिन व्रत रखा, उबले अन्न का भोग लगाया और स्वयं का जल से अभिषेक करवाया। इस व्रत के प्रभाव से चंद्र समस्त दोष से मुक्त हुआ। तभी से इस दिन चांद छठ का व्रत करने की परंपरा शुरू हुई।












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