Bhaddali Navami 2021: देवशयन से पूर्व विवाह का आखिरी शुभ मुहूर्त भड़ली नवमी 18 जुलाई को
नई दिल्ली, 13 जुलाई। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ होता है और चार माह के लिए भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस कारण विवाह आदि समस्त मांगलिक कार्यो पर चार माह के लिए प्रतिबंध लग जाता है। इसलिए देवशयन से पूर्व विवाह का अंतिम शुभ मुहूर्त भड़ली नवमी होता है, जिस पर बिना कोई पंचांग शुद्धि देखे विवाह आदि किए जा सकते हैं। इस बार भड़ली नवमी 18 जुलाई 2021 रविवार को आ रही है। इस दिन देशभर में बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होते हैं। यह दिन आषाढ़ी गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन भी होता है। इसलिए इस दिन देवी मंदिरों और घरों में हवन-पूजन आदि कर कन्या पूजन किया जाता है।

भगवान लक्ष्मीनारायण देते हैं समृद्धि का आशीर्वाद
भड़नी नवमी के दिन व्रत भी रखा जाता है और इस दिन भगवान लक्ष्मीनारायण का विधिवत पूजन किया जाता है। सत्यनारायण पूजा की तरह ही भड़ली नवमी पर भगवान लक्ष्मीनारायण का पूजन किया जाता है। एक चौकी पर केले के पत्तों से मंडप सजाकर उसमें लक्ष्मीनारायण की मूर्ति या तस्वीर रखकर षोडशोपचार पूजन संपन्न किया जाता है। पंच मेवे, फल, पंचामृत, मिष्ठान्न का नैवेद्य लगाकर आरती की जाती है और स्वजनों आदि में प्रसाद का वितरण किया जाता है। जो लोग चातुर्मास में व्रत रखते हैं वे भी इसी दिन चातुर्मास करने का संकल्प भगवान विष्णु के समक्ष लेते हैं।
विशेष प्रयोजन के लिए पूजन
- भड़ली नवमी के दिन अपने विशेष संकल्पों, मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। इस दिन विष्णु भगवान को शुद्ध घी का नैवेद्य लगाने से सकल मनोरथ पूर्ण होते हैं। जीवन में भोग, सुख, मोक्ष आदि की प्राप्ति होती है।
- इस दिन गुप्त नवरात्रि का समापन होता है इसलिए देवी दुर्गा को प्रसन्न करके मनचाहा आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दुर्गा सप्तशती के पाठ करें, हवन करें और कन्या पूजन करें।
- भड़ली नवमी के दिन सुख-समृद्धि की कामना और शत्रुओं को परास्त करने के लिए, जीवन में सफलताएं पाने के लिए आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ किया जाता है। 12 पाठ करने से हृदय शुद्ध होता है। आध्यात्मिकता, शुभता में वृद्धि होती है।












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