'माला' का प्रयोग कैसे करें और किस 'माला' का क्या महत्व है?
लखनऊ। संस्कृत का शब्द है माला है जिसका अर्थ गार्लेंड। एक माला में 108 मनके होते है। माला का उपयोग मन्त्रों के माध्यम से देवता को प्रसन्न किया जाता है। मंत्रो को आमतौर पर सौ या हजारों बार दोहराए जाते हैं। माला का उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि कोई अपने दुहराव की गणना करने के बजाय मंत्र के अर्थ या ध्वनि पर ध्यान केंद्रित कर सके। आमतौर पर प्रत्येक मनका के चारों ओर दक्षिणावर्त अंगूठे को घुमाते हुए प्रत्येक मनका के लिए एक दुहराव कहा जाता है, हालांकि कुछ परंपराएं या प्रथाएं वामावर्त गति या विशिष्ट उंगली के उपयोग के लिए कह सकती हैं। जब कोई मुख्य मनके पर पहुंचता हैं तो माला को घुमाकर फिर से विपरीत दिशा से शरु करते हैं। प्रत्येक मनके के बीच आम तौर पर गांठ होती हैं। यह माला के उपयोग को आसान बनाता है क्योंकि उपयोग करते समय मनके तार पर तंग नहीं होंगे।
चलिए जानते है माला का प्रयोग कैसे करें एवं किस माला का क्या महत्व है...

संस्कृत का शब्द है 'माला'
- शान्ति एवं पुष्टि के प्रयासों में माला को कमल के सूत्र में पिरोयें।
- आकषर्ण या उच्चाटन के प्रयोग में घोड़े की पूंछ के बालों में माला को गूंथना चाहिए।
- अन्य कार्यो की पूर्ति के लिए कच्चे सूती धागे में माला को पिरोना चाहिए।
- तत्वदृष्टा महर्षियों ने रूदाक्ष की माला को मन्त्र सिद्धि के लिए उत्तम माना है, 108 दाने की माला सर्व कार्यो की सिद्धि हेतु उत्तम बतलाई गई है।
दिशा मुख-
- किसी वस्तु को अगर अपने अधिकार क्षेत्र में लाना है तो पूर्व की ओर मुख करके माला का जप करें।
- अभिचार क्रिया करने के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके माला का जप करने से सफलता मिलती है।
- धन की प्राप्ति हेतु अगर जप करना है तो साधक को पश्चिम दिशा की ओर मुख करके जप करना चाहिए।
- शान्ति कर्म, आयु रक्षा, पुष्टि एवं विद्या आदि की प्राप्ति के लिए उत्तर की ओर मुख करके जप करने से लाभ मिलता है।

अन्य मालाओं के लाभ
- सहदेवी के पौधे-दस्त में सहदेवी पौधे की जड़ के सात टुकड़े करें। उन्हें माला की भाॅति लाल धागे में पिरोयें। यह माला कमर में पहनने से दस्त आना बन्द हो जाते है एवं कमर के रोग भी ठीक होते है।
- सीपियों की माला-सीपियों की माला रविवार या मंगलवार के दिन बच्चे के गले में बाॅधने से या निर्गणी की जड़ को मंगलवार के दिन गले में बाॅधने से बच्चों के दाॅत सरलता निकल आते है और कोई कष्ट नहीं होता है।
- रूद्राक्ष की माला-इसकी माला पहनने से किसी भी प्रकार ब्लड प्रेशर नहीं होता है और मन शान्त रहता है।
- तांबे की तिगड़ी-तांबे की तिगड़ी की माला धारण करने से हैजा रोग नहीं होता है।
- पपीते के बीज की माला-प्लेग की बीमारी से बचने के लिए जातक को पपीते के बीज की माला धारण करनी चाहिए।
- कमल के बीज-यदि आप बार रोग से ग्रसित होते है तो कमल के बीज की माला पहनें। ऐसा करने से आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और आप शीघ्र बीमार नहीं होंगे।
- मॅूगे की माला-यदि आप रक्त की बीमारी से ग्रसित है या रक्त की कमी बनी रहती है तो मूॅगे की माला धारण करने से लाभ मिलेगा।
- प्याज की माला-लीवर के रोग ठीक करने के लिए प्याज की माला धारण करनी चाहिए।
- सतावर की माला-सतावर के सात टुकड़ों में सूती धागे से अलग-अगल सात जगह गाॅठे देकर माला बनाए तथा इसे शुभ मुहूर्त में पहनने से सारे ग्रहों को दोष समाप्त हो जाता है।
- खंडित व बेड़ौल माला से जप न करें।
- एक माला से एक ही व्यक्ति जप करे व एक ही व्यक्ति धारण करें।
- माला को जमीन पर या गंदगी में न रखें।
- सोते समय माला को धारण न करें। प्रातःकाल स्नान करने के बाद ही माला को धारण करें।
- मन्त्र जप कभी भी अधूरा न छोड़े।
- माला के सुमेरू का उलंघन न करें अर्थात पूरी होते ही लांघे नहीं, बल्कि आंखों में लगाकर पुनः जप प्रारम्भ करें।













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