Aja Ekadashi 2025 Vrat Katha: अजा एकादशी आज, जानिए व्रत कथा और क्या करने से बचें

Aja Ekadashi 2025 Vrat Katha: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहते हैं, वो पावन दिन आज आया है, आपको बता दें कि इसे पापों से मुक्ति दिलाने वाली एकादशी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत के पालन से पूर्व जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु की पूजा करने इंसान सारी मुश्किलों और परेशानियों से दूर हो जाता है।

अजा एकादशी व्रत कथा (Aja Ekadashi 2025 Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार राजा हरिश्चंद्र अत्यंत धर्मपरायण और सत्यवादी थे लेकिन किन ऐसा आया जब उन्हें ऋषि विश्वामित्र को वचन निभाने के लिए अपना राज्य, पत्नी और पुत्र तक बेचने पड़े। वे श्मशान घाट पर नौकर बन गए। राजा हरिश्चंद्र ने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा।

Aja Ekadashi 2025 Vrat Katha

महर्षि गौतम से अजा एकादशी व्रत के बारे में सुना

एक बार उन्होंने महर्षि गौतम से अजा एकादशी व्रत के बारे में सुना। उन्होंने इस व्रत का पालन किया और उसके प्रभाव से उनके सभी पाप नष्ट हो गए। राजा को पुनः अपना राज्य प्राप्त हुआ और अंततः स्वर्ग की प्राप्ति हुई इसलिए अजा एकादशी को सभी पापों से मुक्त कराने वाली एकादशी कही जाती है।

अजा एकादशी का महत्व (Aja Ekadashi 2025)

  • इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है।
  • जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
  • पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
  • भक्ति भाव से व्रत करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Aja Ekadashi 2025 पर क्या करें?

  • प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें।
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।
  • दान-पुण्य करें, विशेषकर अन्न और वस्त्र का दान करें।
  • शाम को कथा-श्रवण और आरती अवश्य करें।

Aja Ekadashi 2025 पर क्या न करें?

  • अनाज, मांस, प्याज-लहसुन का सेवन न करें।
  • क्रोध, झूठ, चुगली और अपशब्दों से बचें।
  • दूसरों का अपमान न करें।
  • जुआ, मदिरा और नशे से दूर रहें।

श्री विष्णु चालीसा

दोहा

  • विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
  • कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ।।
  • नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
  • प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ।।
  • सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
  • तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ।।
  • शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
  • सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ।।
  • सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
  • सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ।।
  • .पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
  • करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ।।
  • धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
  • भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ।।
  • आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
  • धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया।।
  • अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
  • देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया।।
  • कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
  • शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ।।
  • वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
  • मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ।।
  • असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
  • हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई।।
  • सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
  • तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी।।
  • देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
  • हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी।।
  • तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
  • गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे।।
  • हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
  • देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे।।
  • चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।
  • जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ।।
  • शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
  • करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ।।
  • करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
  • सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ।।
  • दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।
  • पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ।।
  • सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।
  • निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै।।

Disclaimer: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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