Ahoi Ashtami 2025: अहोई अष्टमी आज, क्या है कथा और शुभ मुहूर्त? कितने बजे दिया जाएगा तारे को अर्ध्य?
Ahoi Ashtami 2025: संतान की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला व्रत अहोई आज है। यह व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन माताएं अपने पुत्रों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। माताएं आज निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को तारा देखकर और उसे अर्ध्य देकर अपना उपवास खोलती हैं।
ये व्रत संतानहीन महिलाओं के लिए भी खास है, मान्यता है कि जो कोई भी इस उपवास को सच्चे मन से करता है तो उसकी अहोई माता गोद जरूर भर देती हैं।

अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami 2025 Shubh Muhurt)
कार्तिक कृष्ण अष्टमी का प्रारंभ आज दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से हो रहा है और इसका अंत मंगलवार को सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर होगा। उदयातिथि मान्य होने की वजह से इस बार का उपवास आज रखा गया है। पूजा का शुभ मुहूर्त आज 5:33 PM से 07:08 PM तक का है। तारा निकलने का समय शाम 7 बजकर 32 मिनट है।
पूजा सामग्री ( Ahoi Ashtami 2025)
अहोई माता की मूर्ति या चित्र, जल से भरा कलश, सुपारी, दीपक, फल, फूल, हलवा-पूरी, चांदी का अहोई प्रतीक, सूत, और चावल रखें।
Ahoi Ashtami 2025 पूजा विधि
प्रातः स्नान करके माता अहोई का व्रत संकल्प लें , उसके बाद अहोई माता का चित्र दीवार पर बनाएं या तैयार पोस्टर लगाएं। उनके साथ सप्त बालक (संतान) और सेइ (साही/साहीन) का चित्र बनाएं। फिर सारी सामग्री रखें। माता को हलवा-पुड़ी का भोग लगाएं। फिर हाथ में गेंहू के सात दाने और कुछ दक्षिणा लेकर अहोई की कथा सुनें। तारे देखकर अर्घ्य दें भोजन ग्रहण करें ।
अहोई अष्टमी व्रत कथा (Ahoi Ashtami 2025)
बहुत समय पहले एक साहूकार और उसकी पत्नी रहती थी। उनके सात पुत्र थे। कार्तिक मास की अष्टमी तिथि को उसकी पत्नी अपने घर की मरम्मत के लिए जंगल में मिट्टी लेने गई। जैसे ही वह कुदाल से मिट्टी खोदने लगी, गलती से उसकी कुदाल से एक छोटे से शावक को चोट लग गई और वो मर गया।
साहूकार की पत्नी यह देखकर बहुत दुखी हुई। वह रोती-बिलखती घर लौट आई, परंतु इस घटना के बाद उसके सारे पुत्र एक-एक करके मर गए।
एक दिन वह बहुत दुखी होकर किसी बुजुर्ग महिला के पास गई और अपनी व्यथा सुनाई। बुजुर्ग महिला ने कहा 'तुमने जिस दिन साही के बच्चे को मारा था, वह कार्तिक कृष्ण अष्टमी का दिन था। तुम उसी दिन अहोई माता का व्रत रखो और सच्चे मन से पूजा करो, इससे तुम्हारे पाप का नाश होगा और तुम्हें पुत्र प्राप्त होंगे।'
उसने बुजुर्ग के कहे अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण अष्टमी के दिन अहोई माता का व्रत किया। माता अहोई प्रसन्न हुईं और उसके सात पुत्र पुनः जीवित हो गए। तब से यह व्रत संतान की रक्षा के लिए किया जाने लगा।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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