केरल के मंदिर में होने जा रहा है महा द्रव्यर्थी सहस्र ब्रह्म कलश अभिषेक
केरल के श्रीकृष्ण मंदिर के ब्रह्मचारी पीसी दिनेशन ने महा द्रववर्थी सहस्र ब्रह्म कलशअभिशेकम की महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। कांचि कामकोटि पीतम के जगद्गुरू श्री शंकराचार्य स्वामीगल ने 1923 में अष्टिका समाज की स्थापना की थी। मंदिर में भगवान श्री रामचंद्र, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्ति को स्थापित किया गया, इसके बाद इस मंदिर को पूर्ण रूप से मान्यता मिल गई थी। इन मूर्तियों को विशेष गर्भग्रह में स्थापित किया गया था।

बीते सालों में अष्टिका समाज को लोगों का खूब समर्थन मिला, बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आने लगे, जिसके बाद यहां अन्य देवी-देवताओं जैसे भगवान कार्तिकेय, नवग्रहों की मूर्ति, भगवान गुरुवयूरप्पम की मूर्ति और स्वामी अयप्पन की मूर्ति को स्थापित किया गया। इन सबी मूर्तियों को उसी तरह से स्थापित किया गया जैसे प्राचीन श्रीकृष्ण मंदिर में स्थापित किया गया है। इन देवी-देवताओं की स्थापना के बाद समाज में दैव्यता बढ़ी, यह इस स्तर तक बढ़ी कि अब लोग इस समाज को कोचू गुरुवयूर के नाम से जानते हैं।
पीसी दिनेशन ने बताया कि समाज में देवी-देवाओं की पूजा-अर्चना से लोगों को जो आशीर्वाद मिल रहा था, उसके बाद यह फैसला लिया गया कि भगवान कोचू गुरूवयूरप्पम का महाद्रव्यवर्थी सहस्र ब्रह्म कलशअभिषेक कराया जाए। यह अभिषेक 18 नवंबर से 25 नवंबर के बीच कराया जाएगा। यह समय काफी पवित्र है क्योंकि इसे मंडलम काल के तौर पर जाना जाता है।
का महाद्रव्यवर्थी सहस्र ब्रह्म कलशअभिषेक को केरल में बहुत कम किया जाता है, ना सिर्फ केरल बल्कि बाहर भी इसे कम ही कराया जाता है, क्योंकि इसमे तांत्रिक रिवाज सिद्ध लोगों द्वारा किया जाता है। मंदिर में देवी की शक्ति को और भी बढ़ाने के लिए यह अनुष्ठान किया जाता है। इस अनुष्ठान के तहत महाचतु शुद्धि, समाधी शुद्धि, द्रव्यवर्ती, महाबह्मकलश पूजा, अभिषेक आदि किया जाता है। श्रद्धालुओं को इस पवित्र अनुष्ठान में शामिल होने का मौका मिलने जा रहा है, वह इसमे शामिल होकर भगवान गुरुवयूरप्पन का आशीर्वाद ले सकते हैं।












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