सोसाइटी अचीवर्स के कवर पर छाए रमेश सिप्पी, शोले की 'बसंती' ने किया अनावरण,खोले खूबसूरत राज
मशहूर अभिनेत्री-सांसद हेमा मालिनी ने सोसाइटी अचीवर्स मैगज़ीन के नवीनतम अंक का अनावरण किया। इस विशेष अंक के कवर पर भारतीय सिनेमा के महान फिल्मकार रमेश सिप्पी को सम्मानित किया गया है। इस खास मौके पर रमेश सिप्पी अपनी पत्नी अभिनेत्री किरण जूनेजा, के साथ मौजूद थे।
इस यादगार शाम में अशोक धमणकर (संस्थापक, मैग्नेट पब्लिशिंग), एंड्रिया कोस्टाबीर (चीफ एडिटर, सोसाइटी अचीवर्स), टीम मैग्नेट की जयश्री धमणकर, मारियो फ़ेरेइरा और रिया सचदेवा, साथ ही डॉ. (मानद) अनुषा श्रीनिवासन अय्यर (संस्थापक, नारद पीआर एंड इमेज स्ट्रैटेजिस्ट्स) अपनी टीम के साथ उपस्थित थे।

इस खास मौके पर हेमा मालिनी ने अपने शोले के निर्देशक और वर्षों पुराने मित्र रमेश सिप्पी के साथ जुड़ी यादों को साझा किया। उन्होंने उस दौर की फ़िल्ममेकिंग में लगने वाले कठोर शारीरिक परिश्रम को याद करते हुए एक दिलचस्प प्रसंग सुनाया-कैसे उन्हें गर्मियों की शूटिंग के दौरान तपते पत्थरों पर नंगे पांव नृत्य करना पड़ा था।
उन्होंने मुस्कराते हुए बताया कि 'मेरी मां ने मुझे बचाने के लिए चुपचाप चप्पलें पहनाने की कोशिश की थी लेकिन सिप्पी साहब की पैनी नज़र से कुछ भी छुप नहीं सका। उन्होंने तुरंत कहा कि चप्पलें उतारनी होंगी क्योंकि कैमरे में सब दिखता है। हर शॉट के बाद मुझे पैरों की जलन कम करने के लिए गीले तौलिए के साथ बैठना पड़ता था। यह आसान नहीं था, लेकिन हमें अपने निर्देशक पर पूरा भरोसा था।'
शोले को याद करते हुए हेमा मालिनी ने यह भी कहा कि 'रमेश सिप्पी शुरू में उन्हें भूमिका देने को लेकर असमंजस में थे। उन्हें लगा कि शायद किसी स्टार के लिए मल्टी स्टार वाली फ़िल्म का हिस्सा बनना जोखिम भरा हो सकता है लेकिन मुझे उनकी समझ और कहानी पर विश्वास था,मैंने कभी अपने स्थान के बारे में नहीं सोचा - मैंने सिर्फ़ कहानी को महत्व दिया।

रमेश सिप्पी ने कहा,उस फ़िल्म में हर कलाकार विश्वास के साथ जुड़ा था। हम सब फ़िल्म के लिए काम कर रहे थे, अपने लिए नहीं। इस दौरान उन्होंने धर्मेंद्र को भा याद किया और कहा कि 'एक बार वे शूट पर पहुंचने के लिए लगभग 50 किलोमीटर पैदल चलकर आए। सुबह तड़के पहुंचे, थोड़ी देर आराम किया और बिना किसी शिकायत के कैमरा फेस किया।'
इस पर हेमा जी ने भावुक होकर कहा, वे एक खूबसूरत इंसान थे - कभी शरारती, तो कभी बेहद संवेदनशील। और अभिनेता के रूप में तो वे बेमिसाल थे। उन्होंने शोले के ऐतिहासिक टैंक सीन को भी याद किया और कहा कि वह दृश्य इसलिए अमर है, क्योंकि उसमें धर्मेंद्र ने अपने व्यक्तित्व का वास्तविक सार उड़ेल दिया था। हरि भाई - संजीव कुमार - आज होते, तो इस कवर को देखकर बेहद खुश होते।'












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