हरियाणा में खनन ठेकेदारों को खट्टर सरकार ने दी रियायतें, सरकार के खजाने में आएगा ज्यादा 'धन'
चंडीगढ़। 'विवादों से समाधान' कार्यक्रम के तहत हरियाणा सरकार ने खनन के सालों से लंबित विवादों को सुलझाने के मकसद से ठेकेदारों को कुछ रियायतें दी हैं। सरकार का दावा है कि इससे ठेकेदारों को लाभ मिलेगा और राज्य सरकार को पहले से अधिक राजस्व मिलेगा। साथ ही प्रदेश में खनन गतिविधियों को सुचारू बनाया जा सकेगा।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में यहां वर्षों से लंबित मामलों को लेकर समीक्षा बैठक बुलाई गई। बैठक में खान एवं भू-विज्ञान मंत्री मूलचंद शर्मा और प्रदेशभर से खनन पट्टाधारकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश में अगर कोई खनन पट्टाधारक सहमति पत्र जारी होने की तिथि से 12 महीने के भीतर पर्यावरण संबंधी स्वीकृति और संचालन की सहमति हासिल नहीं कर पाया तो उसे पहले 6 महीनों के लिए अब वार्षिक बोली राशि का एक प्रतिशत, जबकि अगले 6 महीनों के लिए प्रत्येक माह के लिए वार्षिक बोली राशि का 2 प्रतिशत देना होगा। ऐसे ठेकेदारों को देय राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज देना होगा, जो ठेका शुरू होने की तिथि से लागू होगा। हालांकि, ब्याज की राशि कुल देय राशि के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। इसके अलावा, ठेके की अवधि नहीं बदलेगी।
अनुबंध पूरे नहीं तो ठेका होगा रद्द
जिन मामलों में खनन ठेकेदार अनुबंधों को पूरा नहीं कर सके और खानों का संचालन नहीं कर सके। ऐसे मामलों में नीलामी के समय जमा करवाई गई प्रारंभिक सिक्योरिटी राशि (बोली राशि का 10 प्रतिशत) को जब्त करते हुए रद्द कर दिया जाएगा। बोली राशि का 15 प्रतिशत राशि और विभाग द्वारा मांगी गई किसी भी तरह की अन्य राशि माफ कर दी जाएगी। खान क्षेत्र आरक्षित वन, अरावली परियोजना वृक्षारोपण के अंतर्गत पाए जाने पर 50 प्रतिशत से कम पाया गया है।
ऐसे मामलों में भी ठेका समाप्त
ऐसे मामले में ठेका समाप्त माना जाएगा और कोई देयता नहीं होगी। प्रस्तावित उत्पादन के 50 प्रतिशत से कम उत्पादन के लिए पर्यावरण मंजूरी प्राप्त होने की स्थिति में ठेका समाप्त माना जाएगा और किसी भी पक्ष की कोई देयता नहीं होगी। इसी तरह, जिन विषयों में पर्यावरण मंजूरी, स्थापना या संचालन की सहमति से इंकार कर दिया गया था ऐसे मामलों में भी ठेका समाप्त माना जाएगा।
क्षेत्रफल कम हुआ तो राशि होगी कम
यदि किसी ठेकाधारक को आवंटित खान के क्षेत्रफल का 25 से 50 प्रतिशत भाग किन्हीं कारणों से कम हो जाता है तो ऐसे सभी मामलों में वार्षिक ठेका राशि क्षेत्र के अनुपात में कम कर दी जाएगी। हांलाकि, विवादित खनन क्षेत्र कुल क्षेत्र के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। ठेकेदार द्वारा खनन करते हुए पहले 3 वर्षों के दौरान किए गए खनन की मात्रा कुल मंजूरी की मात्रा का 90 प्रतिशत या उससे अधिक हो। खनन क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी होने पर भी ठेका राशि में अधिकतम 50 प्रतिशत राशि ही कम की जाएगी।
एप्लीकेशन के 2 माह बाद खत्म होगा अनुबंध
सरेंडर के लिए एप्लीकेशन देने पर माइनिंग बंद होने की तिथि से 2 महीने बाद अनुबंध को खत्म माना जाएगा और ठेकेदार को केवल 2 महीने के पैसे ही देने पड़ेंगे। सरेंडर की तिथि के बाद उन्हें 2 किस्तें चुकानी पड़ेगी। जो ठेके 31 मार्च, 2010 से पहले समाप्त हो चुके हैं, उनकी पूरी बकाया राशि 90 दिन के अंदर जमा करवा दी जाती है तो ब्याज की सारी राशि माफ कर दी जाएगी। इसी तरह, जो ठेके पहली अप्रैल, 2010 के बाद खत्म हुए हैं या अभी चल रहे हैं। ऐसे मामलों में 90 दिन के अंदर सारी बकाया राशि जमा करवाने पर ब्याज की 50 प्रतिशत राशि माफ कर दी जाएगी।












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