दिल्ली सरकार का बड़ा कदम, ILBS में भी शुरू हुई जीनोम सिक्वेंसिंग लैब

नई दिल्ली, जुलाई 09: दिल्ली सरकार के लोकनायक अस्पताल में पहली बार जीनोम सीक्वेंसिंग लैब की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को एलएनजेपी में और गुरुवार को आईएलबीएस अस्पताल में जीनोम सिक्वेंसिंग लैब का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन लैब्स की मदद से कोरोना के किसी भी नए वैरिएंट की पहचान और उसकी गंभीरता का पता लगाया जा सकेगा। इस बारे में आईएलबीएस के डायरेक्टर डॉ. एस के सरीन ने कहा कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति के आरएनए को उसके वायरस पर सीक्वेंस कराकर पता लगा सकते हैं कि वायरस ने अपना स्वरूप बदला है या नहीं। हमारे पास हर हफ्ते 300 सैंपल को सीक्वेंस करने की क्षमता है और इसका परिणाम भी 5-7 दिन में आ जाएगा। इस दौरान दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन भी मौजूद रहे।

Genome Sequencing Lab started at Delhis LNJP Hospital

मुख्यमंत्री ने ट्वीट करके बताया कि भविष्य की तैयारियों के मद्देनजर आज आईएलबीएस में दिल्ली सरकार की दूसरी जीनोम सिक्वेंसिंग सुविधा की शुरुआत की। आईएलबीएस में जो लैब बनाई गई है, वह एलएनजेपी की लैब से ज्यादा एडवांस है और उत्तर भारत की इस तरह की पहली लैब है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे दिल्ली के लोगों को काफी फायदा होगा। अभी तक हमारे जितने भी सैंपल थे, उसे जांच के लिए केंद्र सरकार के एनसीडीसी में भेजना पड़ता था। अब हम इसकी जांच अपनी लैब में ही कर सकते हैं। अगर कोई नया वैरिएंट आता है, तो हमें तुरंत पता चल जाएगा। उस नए वैरिएंट से निपटने के लिए हमें जो भी रणनीति बनानी होगी, बना सकते हैं।

एक और लैब के चालू होने पर दिल्ली के लोगों के साथ आईएलबीएस की पूरी टीम को बधाई देना चाहता हूं। डॉक्टर एस के सरीन ने कहा कि अभी हर वैरिएंट खतरनाक नहीं है, लेकिन हमारे लिए यह जानकारी रखनी जरूरी है कि दिल्ली में नए-नए मरीज आ रहे हैं, तो क्या वे बदलते हुए वायरस से हैं, या पुराने वायरस से हैं। पिछले साल के करीब एक लाख से ज्यादा पुराने मरीज के सैंपल हमारे पास हैं। जब आदेश मिलेगा, हम सारे सैंपल या उसमें से कुछ को सीक्वेंस कर सकते हैं। गुणवत्ता के मामले में भी हम राष्ट्रीय स्तर की जो लैब हैं, उनकी तरह काम करते हैं।

जीनोम सिक्वेंसिंग यह समझने के लिए मूलभूत उपकरण बन गया है कि वायरस कैसे विकसित हो रहा है और इससे बचाव के लिए क्या करने की जरूरत है। यह एक ऐसी तकनीक है, जो आम लोगों में वायरस के बदलते स्वरूप को समझने और पहचानने में मदद करती है। कोरोना की जीनोम सिक्वेंसिंग के जरिए वर्तमान में फैले वायरल स्ट्रेन पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी और शहर में किसी भी नए वैरिएंट की समय पर पहचान व पता लगाने में मदद मिलेगी। इससे दिल्ली को बेहतर तरीके से कोविड-19 संक्रमण की लहर से निपटने के लिए तैयार किया जा सकेगा।

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