दिल्ली में अब नहीं होगी ऑक्सीजन की किल्लत, 36 प्लांट लगे 27 और होने जा रहे शुरू
नई दिल्ली, 05 अगस्त: कोविड की दूसरी लहर में दिल्ली में ऑक्सीजन की मारामारी किसी से छुपी नहीं है। ऑक्सीजन की किल्लत ने न सिर्फ आम आदमी बल्कि स्वास्थ्य विभाग व सरकारों की नींद उड़ा दी थी। अब संभावित तीसरी लहर को देखते हुए ऑक्सीजन की कमी को दूर करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। अब तक की तैयारी के अनुसार दिल्ली में 160 ऑक्सीजन प्लांट लगाने का काम चल रहा है, जिनकी क्षमता 148.11 मीट्रिक टन हो सकती है।

अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में ऑक्सीजन प्लांट लगाने का काम तेजी से चल रहा है। अस्पतालों द्वारा कम से कम 150 मीट्रिक टन क्षमता तक ऑक्सीजन प्लांट लगाने की मांग की गई है। इसके लिए कुल 160 प्लांट लगाने पर काम शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्राइवेट और सरकारी दोनों प्रकार के अस्पतालों में दूसरी लहर के दौरान ऑक्सिजन की कमी हुई थी, इसलिए सरकारी और प्राइवेट दोनों जगहों पर यह प्लांट लगाया जा रहा है। अब तक 36 प्लांट लगाए जा चुके हैं।
31 अगस्त तक 27 और प्लांट शुरू होने की उम्मीद है। 15 अक्टूबर तक तीन और प्लांट शुरू करने की योजना है। केंद्र सरकार के अस्पतालों में छह प्लांट शुरू किए जा चुके हैं। प्राइवेट अस्पतालों में कुल 84 प्लांट लगाए जाने हैं, जिनमें अब तक 37 को शुरू किया जा चुका है और 47 पर काम चल रहा है। कुल 160 प्लांट में से दिल्ली सरकार के अस्पतालों में 66 प्लांट लगने हैं, जिनमें से 17 पीएम केयर फंड के तहत लगाए जा रहे हैं।
हवा से ऑक्सीजन बनाने वाले प्लांट भी लग रहे
दिल्ली सरकार पीएसए तकनीक पर ऑक्सीजन प्लांट भी लगा रही है। यह तकनीक ऑक्सीजन कन्संट्रेटर की तरह काम करती है। दिल्ली सरकार के संजय गांधी अस्पताल, सत्यवादी हरिश्चंद्र अस्पताल और भगवान महावीर अस्पताल में यह प्लांट लगने वाले हैं। इस तरह के प्लांट में प्रेशर स्विंग एड्जॉर्ब्शन (PSA) टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया जाता है। पीएसए प्लांट में हवा से ही ऑक्सीजन बनाने की अनूठी टेक्नॉलजी होती है। एक्सपर्ट का कहना है कि इस तकनीक में कम जगह की जरूरत होती है और इसे ट्रांसपोर्ट करने की जरूरत नहीं होती है। अस्पताल में इसका प्लांट लगाकर इमरजेंसी में इस्तेमाल किया जा सकता है।












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