Wrestlers Agitation: क्या फिर से शाहीन बाग की तरह दिल्ली की घेराबंदी होगी?
Wrestlers protest, कुश्ती संघ की अंदरुनी व्यवस्था की लड़ाई पहले जाट बनाम राजपूत की लड़ाई बनी, फिर कांग्रेस बनाम भाजपा की लड़ाई बनी और अब सरकार बनाम विपक्ष की लड़ाई बन गई है।

क्या मोदी सरकार एक बार फिर शाहीन बाग़ और किसान आन्दोलन जैसे संकटों से घिरने वाली है? इस बार भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार दोनों को ही नैतिकता के आधार पर घेरने की कोशिश हो रही है।हालांकि कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का इस्तीफा करवा कर मोदी सरकार इस संकट से बच सकती थी।
यह बात शुरू होती है दिसंबर 2022 से जब महिला पहलवानों का कैंप लखनऊ में लगाने का एलान हुआ था।हरियाणा की महिला पहलवानों का कहना था कि जब ज्यादातर महिलाएं हरियाणा से हैं, तो कैंप हरियाणा या दिल्ली में क्यों नहीं लगाया जाता।लखनऊ में क्यों लगाया जाता है।लेकिन बृजभूषण सिंह क्योंकि यूपी से हैं और राजनीतिज्ञ है, इसलिए उन्हें भी अपना राजनीतिक रूतबा दिखाना होता है|वह लखनऊ में कैंप लगाने पर अड़े रहे।

इतना ही नहीं उन्होंने कथित तौर पर हरियाणा के इन पहलवानों को रिटायर कर देने की धमकी भी दी।दूसरा मुद्दा यह था कि ओलंपिक और एशियाई खेलों में मेडल जीतने वाले हरियाणा के इन खिलाड़ियों का कहना था कि वे राष्ट्रीय खेलों में हिस्सा नहीं लेंगी।जबकि कुश्ती महासंघ का कहना था कि राष्ट्रीय खेलों में जीतने वालों को ही ओलंपिक और एशियाई खेलों में भेजा जाएगा।
जल्द ही इस लड़ाई को जाट बनाम राजपूत बना दिया गया|इसकी भी पृष्ठभूमि है, कुश्ती महासंघ के पिछले चुनाव में अध्यक्ष पद पर यूपी के राजपूत बृजभूषण शरण सिंह और हरियाणा के जाट दीपेन्द्र हुड्डा में मुकाबला हुआ था।बृजभूषण शरण सिंह जीत गए थे, दीपेन्द्र हुड्डा हार गए थे।बृजभूषण शरण सिंह भाजपा के सांसद हैं और दीपेन्द्र हुड्डा तब कांग्रेस के सांसद थे।इसलिए यह लड़ाई भाजपा बनाम कांग्रेस भी है|
इस लड़ाई ने जनवरी 2023 में विकृत रूप ले लिया, जब कांग्रेस की शह पर हरियाणा के जाट पहलवान बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ गए|तब बृजभूषण की तरफ से इन आरोपों का खंडन भी किया गया और उन्होंने यह भी कहा कि अगर इनके आरोप सही हैं तो इन्होने पुलिस में शिकायत दर्ज क्यों नहीं की।खेल मंत्रालय के बीच बचाव और आरोपों की जांच के लिए दो कमेटियां बना कर धरना उठ गया था।
एक कमेटी भारतीय ओलंपिक संघ ने बनाई थी और दूसरी खेल मंत्रालय ने।दोनों ही कमेटियों में खिलाड़ी भी रखे गए थे|तीन महीनों में दोनों कमेटियों को रिपोर्ट देनी थीं।यह एक अवसर था कि आने वाले संकट को भांप कर बृजभूषण शरण सिंह कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर संकट टाल देते।
बारह पहलवान इन कमेटियों के सामने पेश हुए थे।दोनों कमेटियों ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, लेकिन रिपोर्ट अभी भी जगजाहिर नहीं की गई।अलबत्ता खबरें लीक की गईं कि यौन शोषण के आरोप गलत पाए गए हैं।यह हरियाणा की जाट महिला पहलवानों की राजनीतिक और नैतिक हार थी।इन खबरों से आहत सात महिला पहलवानों ने बाकायदा पुलिस स्टेशन में यौन शोषण की शिकायत देकर दुबारा मोर्चा खोल दिया, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की, तो वे फिर धरने पर जा बैठीं।
कपिल सिब्बल ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दाखिल करवा कर पुलिस को एफआईआर दर्ज करवाने का आदेश करवाया, तब जाकर एफआईआर दर्ज हुई।क्योंकि शिकायत करने वालों में एक लडकी 17 साल की थी, इसलिए एक एफआईआर पोक्सो एक्ट में भी हुई।कायदे से बृजभूषण शरण सिंह की तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए थी।लेकिन उलटे दिल्ली पुलिस ने धरने पर बैठी महिला पहलवानों को परेशान करना शुरू कर दिया, उनका खाना रोका गया, बिजली बंद कर दी गई।
तीन मई की रात को तो हद ही हो गई, जब बरसात के बाद फोल्डिंग बेड और बिस्तर मंगवाए गए, तो पुलिस ने सामान नहीं उतरने दिया।पुलिस की ज्यादती में एक महिला पहलवान का सिर फट गया।एक वीडियो सामने आया है जिसमें कुछ लोग फोल्डिंग बेड लेकर प्रोटेस्ट में घुसते दिख रहे हैं, वहीं दिल्ली पुलिस उन्हें ऐसा करने से रोक रही है।
घटना के बाद धरने पर बैठे बजरंग पूनिया समेत अन्य पहलवानों का बयान आया।इसमें वह सारे देशवासियों से कह रहे हैं कि उनके प्रदर्शन को लोग समर्थन देने दिल्ली के जंतर-मंतर आएं।पूनिया ने पुलिस पर बल प्रयोग करने और बहन-बेटियों के साथ गाली-गलौच करने का आरोप भी लगाया है।धरने पर बैठे पहलवानों ने वह अपील कर दी है, जिसका अंदेशा था। वह अपील यह है कि जिस तरह कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने ट्रेक्टर ट्रालियों से राजधानी दिल्ली को घेर लिया था, उसी तरह किसानों को दिल्ली कूच का आह्वान कर दिया है।
यह बात तो पहले से तय हो गई थी कि कुश्ती संघ की अंदरुनी व्यवस्था की लड़ाई पहले जाट बनाम राजपूत की लड़ाई बनी, फिर कांग्रेस बनाम भाजपा की लड़ाई बनी और अब सरकार बनाम विपक्ष की लड़ाई बन गई है।सत्यपाल मलिक, दीपेन्द्र हुड्डा, भूपेन्द्र हुड्डा और जयंत चौधरी ने धरने पर जाकर जाट बनाम राजपूत की लड़ाई बना दिया था।प्रियंका वाड्रा ने धरने पर जाकर कांग्रेस बनाम भाजपा बना दिया था|आतिशी मार्लिना, सौरभ भारद्वाज और अरविन्द केजरीवाल ने धरने पर जाकर विपक्ष बनाम मोदी सरकार की लड़ाई बना दिया|
अपने सरकारी बंगले पर करोड़ों खर्च करके भाजपा के निशाने पर आ चुके केजरीवाल ने इस धरने के बहाने दिल्ली की जनता और मीडिया का ध्यान खुद से हटा दिया है। उन्होंने इस धरने को उसी तरह समर्थन दिया है, जैसे शाहीन बाग़ के धरने को समर्थन दिया था और बाद में किसान आन्दोलन को समर्थन दिया था|
तीन मई की रात को महिला पहलवानों के लिए बिस्तर लेकर आम आदमी पार्टी का विधायक सोमनाथ भारती ही पहुंचा था, जिसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया क्योंकि वह बिना पुलिस की अनुमति लिए फोल्डिंग बेड लेकर आया था।आम आदमी पार्टी की जंतर मंतर को शाहीन बाग़ बनाने की योजना है, ताकि उनके शीशमहल से ध्यान हट कर लोगों का ध्यान मोदी सरकार के खिलाफ आन्दोलन पर आकर टिक जाए।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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