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Global Terrorist Makki: आतंकी मक्की के मामले में चीन ने क्यों छोड़ दिया पाकिस्तान का साथ?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान के आतंकवादी और मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान मक्की को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया। क्या कारण है कि चीन ने इस मामले में संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान का साथ नहीं दिया?

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Global Terrorist Makki: पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद के बहनोई अब्दुल रहमान मक्की को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अपनी आईएसआईएल (दाएश) और अल-कायदा प्रतिबंध समिति के तहत वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया है।

68 वर्ष के मक्की ने 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों की साजिश रची थी। 22 दिसंबर, 2000 में लाल किले पर हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड भी मक्की ही था। इसके अलावा मक्की जम्मू-कश्मीर में हुई कई आतंकी घटनाओं में शामिल रहा है। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में मक्की की भूमिका थिंक टैंक की थी और वह सैकड़ों आतंकी घटनाओं का प्रमुख षड़यंत्रकर्ता था।

अमेरिकी सरकार ने मक्की पर 2 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया हुआ है। भारत और अमेरिका, दोनों ने मक्की को अपने-अपने देश के कानूनों के तहत आतंकवादी भी घोषित कर रखा था किन्तु जून, 2022 में जब मक्की को यूएनएससी 1267 समिति के तहत ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने का प्रस्ताव लाया गया था तो चीन ने पाक आतंकवादी मक्की को ग्लोबल टेररिस्ट लिस्ट में शामिल करने पर अड़ंगा लगाया था।

हालांकि इस बार चीन के बदले रुख से पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है वहीं भारत की वैश्विक परिदृश्य पर बड़ी जीत हुई है। पहले से ही बदहाल और आर्थिक रूप से बर्बाद होते जा रहे पाकिस्तान के लिये उसके यहां पल रहे आतंकी मक्की का वैश्विक आतंकवादी घोषित होना दुनिया की इस स्वीकारोक्ति पर भी मुहर है कि विश्व में आतंकवाद का पोषक पाकिस्तान ही है। कहा जाता है कि मक्की आतंकी संगठन जमात-उत-दावा का भी प्रमुख सदस्य है।

साथ ही मक्की पाकिस्तान के इस्लामिक वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन अहल ए हदीस व लश्कर-ए-तैयबा में अच्छी पैठ रखता है। अब सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2610 (2021) के पैरा 1 में निर्धारित और अपनाई गई नीति के तहत आंतकी मक्की की संपत्ति जब्त होगी, यात्रा और हथियार रखने पर प्रतिबन्ध लगेगा।

आतंकवाद की पनाहगाह है पाकिस्तान

अब्दुल रहमान मक्की के वैश्विक आतंकी घोषित होने के बाद यह साबित हो गया है कि पाकिस्तान पूरी दुनिया के लिए नासूर बन चुके आतंकवाद की सुरक्षित पनाहगाह है। इससे पहले भी पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों और आतंकियों को वैश्विक आतंकी घोषित किया जा चुका है। हालांकि 17 जनवरी, 2023 का दिन संभवतः पाकिस्तान कभी नहीं भूल पायेगा क्योंकि इसी दिन संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान से जुड़े कुल 150 आतंकियों और आंतकी संगठनों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इस सूची में 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों का आरोपी दाउद इब्राहिम भी शामिल है।

चीन बचाता रहा है पाकिस्तानी आतंकियों को

चीन ने हमेशा से भारत विरोध के चलते पाकिस्तान और वहां पोषित आतंकवाद को प्रोत्साहित किया है। बलूचिस्तान और सिंध प्रान्तों में अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट्स शुरू करके उसने पाकिस्तान को आर्थिक गुलाम भी बना लिया है। पूर्व में चीन ने पाकिस्तान स्थित और संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर को नामित करने के प्रस्तावों को बार-बार अवरुद्ध किया था।

वहीं अगस्त, 2022 में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर अब्दुल रऊफ के खिलाफ प्रस्तुत प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया था। सितंबर, 2022 में भारत और अमेरिका ने 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड आतंकवादी साजिद मीर को ग्लोबल आतंकियों की लिस्ट में शामिल करने की मांग की थी, जिस पर चीन ने पुनः अडंगा लगा दिया था।

अक्‍टूबर, 2022 में लश्कर के आतंकी शाहिद महमूद को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के प्रस्‍ताव को भी चीन ने रुकवा दिया था जबकि महमूद को तो ओबामा प्रशासन ने लश्कर आतंकी बताया था। ऐसा ही कुछ जून, 2022 में चीन ने पाकिस्तान और मक्की के पक्ष में किया किन्तु इस बार उसके बदले रुख से पाकिस्तान की सिट्टी-पिट्टी गुम है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर चीन के रुख में बदलाव कैसे आया और इसका पाकिस्तान को कितना नुकसान उठाना पड़ सकता है?

चीन के बदले रुख से परेशान पाकिस्तान

अब्दुल रहमान मक्की के वैश्विक आतंकी घोषित होने के बाद प्रतिक्रिया में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनविन ने इतना ही कहा कि आतंकवाद मानवता का साझा दुश्मन है। अब चीन की इस प्रतिक्रिया के बाद यह निश्चित हो गया है कि चीन अंतरराष्ट्रीय दबाव, भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और पाकिस्तान के अंदरूनी हालातों से खुश नहीं है।

चीन ने पाकिस्तान में भारी-भरकम आर्थिक निवेश किया है और चीनी सैनिक तथा अधिकारियों की मौजूदगी पाकिस्तानियों को रास नहीं आ रही जिससे चीन का विरोध हो रहा है। कई बार आम पाकिस्तानियों द्वारा चीनियों पर हमले हुए हैं और पाक पोषित आतंकियों ने भी चीनियों को निशाना बनाया है। रही सही कसर चीन में उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों पर पाकिस्तान के सवाल उठाने से पूरी हो गई है।

दरअसल, चीन में बड़े पैमाने पर उइगर मुसलमानों पर अमानवीय अत्याचार हो रहे हैं जिसे चीन कभी स्वीकार नहीं करता और मुस्लिम राष्ट्र इस मुद्दे को उठाते नहीं हैं। हालांकि पाकिस्तान ने उइगर मुस्लिमों के मुद्दे पर चुप्पी बरती थी किन्तु इस वर्ष की शुरुआत में पाकिस्तान के महावाणिज्य दूतावास ने चीन में उइगर मुस्लिमों पर हो रही ज्यादती को ट्विटर के माध्यम से व्यक्त किया था जिससे चीन असहज हो गया था। बाद में ट्वीट को मिटा दिया गया लेकिन चीन और पाकिस्तान में जो दूरी आनी थी वह आ गई।

भारत के पक्ष को वैश्विक स्वीकृति मिली

भारत पाकिस्तान की स्थापना के बाद से ही सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है और यह बात उसने कई बार दुनिया को बताई भी है। यह भारत की कूटनीतिक सफलता ही है कि भारत के पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को संयुक्त राष्ट्र ने स्वीकार करते हुए उसके ऊपर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। चीन भी भारत की इसी बढ़ती ताकत से परेशान है और कोविड पर उठते सवालों तथा अंतरराष्ट्रीय दबावों को वह अब और नहीं झेल सकता।

चीन समझ चुका है कि भारत भी अब एशिया का सरदार है और उसके साथ कदमताल करना ही हितकर है। अब भारत के सामने एक सुनहरा अवसर है कि वह इसी प्रकार कूटनीति की ताकत से साजिद मीर, अब्दुल रऊफ अजहर, शाहिद महमूद और तल्हा सईद जैसे पाक आतंकियों को भी वैश्विक आतंकी घोषित करवाए ताकि भारतीयों की न्याय की आस पूरी हो सके।

यह भी पढ़ें: Abdul Rehman Makki ग्लोबल आतंकी घोषित, भारत के लिए है अहम बात, जानिए कैसे?

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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