Telangana Elections: भाजपा और कांग्रेस का तेलंगाना पर जोर, केसीआर फिर भी नहीं कमजोर
Telangana Elections: रविवार 17 सितंबर को हैदराबाद मुक्ति दिवस के अवसर पर कांग्रेस ने जहां अपनी कार्यसमिति की बैठक हैदराबाद में आयोजित की, वहीं केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी रविवार को हैदराबाद में रैली को संबोधित किया। कांग्रेस की कार्यसमिति और शाह की रैली में एक समानता रही और वह यह थी कि दोनों ने तेलंगाना की जनता से के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की पार्टी भारत राष्ट्र समिति (पूर्व में नाम तेलंगाना राष्ट्र समिति) के शासन से मुक्ति पाने की अपील की।
कर्नाटक में सरकार बनाने के बाद कांग्रेस दक्षिण के दूसरे राज्य तेलंगाना में अपने लिए संभावना देख रही है, वहीं भाजपा इस राज्य में सरकार बनाकर कर्नाटक की भरपाई करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। कांग्रेस और भाजपा से मिल रही दोहरी चुनौती से निपटने के लिए बीआरएस अध्यक्ष और तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। वो हर हाल में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए राज्य का खजाना जनता पर लुटाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। भाजपा, कांग्रेस और सत्तारूढ़ बीआरएस के बीच तेलंगाना में मचे घमासान से एक बात तय है कि इस बार का विधानसभा चुनाव त्रिकोणीय होगा।

रविवार को हैदराबाद में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति ने 14 सूत्रीय प्रस्ताव पास किया और भरोसा जताया कि पार्टी साल के अंत में 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में बहुमत हासिल कर लेगी। गौरतलब है कि इस साल 75 दिनों के भीतर राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में चुनाव होने वाले हैं।
सत्ता में आने के लिए कांग्रेस ने तेलंगाना की जनता से 6 वादे किए हैं। इसमें महालक्ष्मी योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 2500 रूपये की वित्तीय सहायता के साथ 500 रूपये में गैस सिलेंडर। रायतु भरोसा गारंटी के तहत प्रदेश के किसानों को सालाना 15 हजार की वित्तीय सहायता के साथ ही खेतिहर मजदूरों को 12 हजार की सहायता, गृह ज्योति गारंटी योजना के तहत सभी घरों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली। इंदिरम्मा इंदु गारंटी योजना के तहत जिनके पास अपना मकान नहीं है, उनको मकान के लिए 5 लाख दिए जाएंगे।
कांग्रेस ने तेलांगना आंदोलन के सेनानियों को 250 वर्ग गज का प्लॉट देने की भी घोषणा की है। पांचवी गारंटी के तहत छात्रों को 5 लाख रूपये का भरोसा कार्ड दिया जाएगा और हर मंडल में एक तेलंगाना इंटरनेशनल स्कूल भी खोला जाएगा। छठी गारंटी के तहत 10 लाख रूपये का राजीव आरोग्यश्री बीमा मिलेगा और चार हजार रूपये की मासिक पेंशन भी देने का वादा कांग्रेस ने किया है।
केसीआर को इसी बात का डर सता रहा है कि तेलंगाना में हाशिए पर पड़ी कांग्रेस फिर से खड़ी होने और चुनौती देने की स्थिति में आ रही है। वहीं जमीनी स्तर पर काफी मजबूत हो चुकी भाजपा भी बीआरएस के लिए तीसरी चुनौती बन चुकी है।
अब लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के लिए केसीआर अपने कुछ लोकप्रिय चुनावी वादों पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं, जिसमें किसानों के लिए निवेश समर्थित रायतु बंधु योजना, गरीबों को 2 बीएचके सस्ती आवास योजना के तहत आवास आवंटन और अनुसूचित जातियों के लिए बड़े पैमाने पर निवेश समर्थित दलित बंधु योजना शामिल हैं।
केसीआर ने 24 अक्टूबर से राज्य भर के कक्षा 1 से 10 तक तक के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए 'चीफ मिनिस्टर फ्री ब्रेकफास्ट स्कीम' शुरू करने का निर्णय लिया है। इस नई योजना के क्रियान्वयन में सरकार 400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च करेगी। इसके अलावा चंद्रशेखर राव राज्य के 9 लाख 2 हजार 843 किसानों के 5809.78 करोड़ रुपए का कर्ज माफ करने की घोषणा कर चुके हैं। चंद्रशेखर राव ने 2018 में राज्य के किसानों से वादा किया था कि जिन किसानों ने एक लाख रुपए से कम का कर्ज लिया है, उन्हें कर्ज के बोझ से मुक्त किया जायेगा।
तेलगांना में जहां कांग्रेस और बीआरएस रेवड़ी कल्चर के सहारे सत्ता को साधने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के दम पर सत्ता में आने का ताना बाना बुन रही है। भाजपा राष्ट्रीय महासचिव और तेलंगाना के प्रभारी सुनील बंसल के नेतृत्व में जमीनी स्तर पर अपना आधार और आकार बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।
गौरतलब है कि 119 सदस्यों वाली तेलंगाना विधानसभा में भाजपा को 2018 के चुनावों में सिर्फ एक सीट और सात प्रतिशत वोट हासिल हुए थे। लेकिन उसके कुछ ही माह बाद हुए 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तेलंगाना से लोकसभा की 4 सीटें अपने नाम कर ली थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 21 विधानसभा सीटों पर बढ़त बना ली थी और अपना वोट प्रतिशत 19 प्रतिशत तक पहुंचा दिया था। उसके बाद 2020 के ग्रेटर हैदराबाद नगर निकाय चुनाव में भाजपा को कुल 150 वार्डो में से 38 वार्डो पर 34.56 प्रतिशत वोट शेयर मिलने के बाद भाजपा को भरोसा करने का आधार मिल गया था कि इस राज्य में भाजपा का भविष्य सुनहरा हो सकता है। यही कारण है कि तेलंगाना के इस विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 'मिशन 90' का लक्ष्य रखा है।
तेलंगाना में पिछले तीन साल में हुए उपचुनाव और निकाय चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन से यह साफ है कि भाजपा तेलंगाना में एक ताकत के रूप में उभर रही है। तेलंगाना में लगातार जमीनी स्तर पर काम रही भाजपा ने नवंबर, 2020 में दुब्बक सीट पर हुए उपचुनाव में बीआरएस को हराकर और उसके बाद दूसरा तगड़ा झटका नवंबर, 2021 में हुजुराबाद सीट पर हुए उपचुनाव में बीआरएस को हराकर दिया था। नवंबर, 2022 में मानुगोड विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में बीआरएस बमुश्किल भाजपा से अपनी सीट बचा सकी।
तेलंगाना में अपनी संभावनाओं को मजबूत करने के लिए भाजपा की नजर बीआरएस और कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं पर है। टीआरएस के सांसद रहे कोंडाविश्वेश्वर रेड्डी और नरसिंह गौड़ा भाजपा में आ चुके हैं, वहीं कांग्रेस की नजर भी चद्रशेखर राव से नाराज चल रहे पूर्व कांग्रेसी नेताओं पर है। कांग्रेस इन नेताओं की घर वापसी के लिए कोशिश कर रही है।
तेलंगाना में बीआरएस और भाजपा में जारी कड़े संघर्ष के बीच कांग्रेस ने भी अपनी खोई हुई जमीन पाने की कोशिश शुरू कर दी है। हैदराबाद में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक करवाना इसी प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। तेलगांना में बीआरएस और भाजपा में जारी लड़ाई के बीच कांग्रेस भी खेल में शामिल होकर इसे त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही है। तेलगांना कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी की राज्यव्यापी 'परिवर्तन यात्रा' कांग्रेस की लड़ाई में वापसी करा सकती है।
कांग्रेस को इस बात का दर्द सताता है कि तेलंगाना राज्य कांग्रेस ने बनाया लेकिन तेलंगाना की जनता ने उसको सत्ता नहीं सौंपी। कांग्रेस के हाथ में न आंध्र प्रदेश रहा और न ही तेलंगाना। यही दर्द रविवार को सोनिया गांधी के भाषण में भी दिखा जब सोनिया गांधी ने कहा कि तेलंगाना में वह कांग्रेस की सरकार देखना चाहती हैं क्योकि तेलंगाना को राज्य का दर्जा उन्होंने दिलवाया।
अब देखना यह है इस बार तेलंगाना के मतदाता केसीआर के साथ तीसरी बार भी बने रहते हैं या कांग्रेस के पास जाते हैं, या दोनों को छोड़कर भाजपा का दामन थाम लेते हैं। जो भी होगा वह तो चुनाव के बाद पता चलेगा लेकिन तेलंगाना आंदोलन से निकले चंद्रशेखर राव दो बार प्रदेेश के मुख्यमंत्री के रूप में यह साबित कर चुके हैं कि प्रदेश की जनता से उनका लगाव है। हालांकि त्रिकोणीय संघर्ष में बाजी किसके हाथ लगेगी या फिर त्रिशंकु विधानसभा बनेगी, इसका अनुमान लगाना अभी कठिन है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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